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हरिद्वार में पेड़ पर फंसा गुलदार, चार घंटे उल्टा लटका रहा, फिर ट्रैंकुलाइज कर रेस्क्यू

हरिद्वार वन प्रभाग के रणसुरा गांव में गुलदार पापुलर के पेड़ की टहनी में उल्टा लटका रहा, वन विभाग की टीम ने ट्रैंकुलाइज कर उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।

हरिद्वार। हरिद्वार वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले रणसुरा गांव में एक गुलदार पापुलर के पेड़ की टहनी में उल्टा लटक गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद गुलदार को ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। घायल हालत में मिले गुलदार को इलाज के लिए चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है।

चार घंटे तक उल्टा लटका रहा गुलदार

ग्रामीणों के अनुसार गुलदार पापुलर के पेड़ की ऊपरी टहनी में उल्टा लटका हुआ था और उसका एक पैर टहनी में फंस गया था। जब तक टीम मौके पर पहुंची और उसे रेस्क्यू किया गया, तब तक गुलदार करीब चार घंटे तक उसी हालत में लटका रहा। देर तक उल्टा लटके रहने के कारण गुलदार की हालत कमजोर पड़ गई थी और वह नीचे उतरने की कोशिश भी नहीं कर पा रहा था।

पेड़ की टहनी में फंसा था पैर

गुलदार के पैर के टहनी में फंसने के कारण वह खुद को छुड़ाने में असफल रहा और उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हो गए। वन विभाग के अनुसार गुलदार पथरी क्षेत्र के जंगल से आबादी की तरफ बढ़ रहा था और इसी दौरान पेड़ पर चढ़कर टहनी में फंस गया। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि पैर फंसने के बाद जानवर खुद को छुड़ाने में नाकाम रहता है और यह स्थिति उसके लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है।

भीड़ ने रेस्क्यू में डाली बाधा

रेस्क्यू अभियान के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और बाहर से आए लोग मौके पर इकट्ठा हो गए, जिससे टीम को काम करने में बाधा आई। वन विभाग के कर्मचारियों को भीड़ को पीछे हटाने में कड़ी मेहनत करनी पड़ी। टीम के सदस्यों का कहना है कि भीड़ के दबाव के कारण रेस्क्यू में थोड़ी देरी हुई, लेकिन हालात को भांपते हुए सभी को सुरक्षित दूरी पर रखा गया।

वन विभाग ने की रेस्क्यू की कोशिश

वन विभाग की टीम में रेंज अधिकारी, वनरक्षक और विशेषज्ञ कर्मचारी शामिल थे। टीम ने पहले गुलदार की हालत का जायजा लिया और उसे ट्रैंकुलाइज करने का निर्णय लिया। एक बार गुलदार बेहोश हुआ तो टहनी काटकर उसे कंट्रोल में किया गया और जाल के सहारे सुरक्षित नीचे उतारा गया। पूरी प्रक्रिया में घंटों की मेहनत लगी और टीम के सदस्यों को काफी सतर्कता बरतनी पड़ी।

चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर में उपचार

रेस्क्यू के बाद गुलदार को चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया, जहां उसका उपचार शुरू कर दिया गया है। वन्यजीव चिकित्सकों के अनुसार गुलदार के पैर में चोट आई है और उसे देखभाल की जरूरत है। उपचार के बाद ही तय किया जाएगा कि गुलदार को जंगल में छोड़ा जाएगा या उसे किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा।

ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। रणसुरा के निवासियों का कहना है कि गुलदार के आसपास होने की सूचना लगातार मिल रही थी, जिससे बच्चे और महिलाएं डरे हुए थे। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले जंगल की तरफ न जाएं और गुलदार या अन्य वन्यजीव देखने पर तुरंत विभाग को सूचना दें, ताकि उचित कार्रवाई की जा सके।

जनपद में बढ़े वन्यजीव के मामले

पथरी क्षेत्र के जंगलों से आबादी की तरफ वन्यजीवों के बढ़ने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल में भोजन और पानी की उपलब्धता कम होने तथा जंगल के दायरे सिकुड़ने के कारण जानवर आबादी वाले इलाकों की तरफ बढ़ रहे हैं, जिससे इंसान और वन्यजीव के बीच टकराव बढ़ रहा है और ऐसी घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है।