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उत्तरकाशी

पुरोला के विधायक और पत्नी के खाते में पहुंची मनरेगा मजदूरी, मचा हंगामा

उत्तरकाशी के पुरोला विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक और उनकी पत्नी के खातों में मनरेगा की मजदूरी जमा होने का मामला सामने आया है, ब्लॉक प्रशासन ने रिकवरी की बात कही है।

उत्तरकाशी। जनपद के पुरोला विधानसभा क्षेत्र में मनरेगा मजदूरी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। भाजपा विधायक और उनकी पत्नी के खाते में मनरेगा की मजदूरी जमा होने की जानकारी सामने आने के बाद ब्लॉक कार्यालय में हड़कंप मच गया है। मामले की जानकारी मिलने पर प्रशासन ने जांच तेज कर दी है और वसूली की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।

विधायक का पहले से था जॉब कार्ड

मनरेगा नियमों के अनुसार ग्रामीण परिवार के जॉब कार्ड के आधार पर मजदूरी का भुगतान किया जाता है। विधायक का जॉब कार्ड वर्ष 2022 से पहले का बताया जा रहा है, जबकि वे विधायक बनने के बाद भी मनरेगा के कार्यों में मजदूरी लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी तरह उनकी पत्नी के नाम पर भी जॉब कार्ड के आधार पर मजदूरी का भुगतान हुआ है, जिसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

पत्नी के नाम पर दिखाए गए निर्माण कार्य

रिकॉर्ड के अनुसार जून 2022 में विधायक की पत्नी को रेक्चा गांव में पीसीसी खड़ंजा निर्माण के दो आवंटन किए गए। अगस्त और सितंबर 2024 में बाजुडी तोक में पीसीसी निर्माण तथा नवंबर 2024 में समलाडी तोक में वृक्षारोपण का कार्य पत्नी के नाम पर दर्शाया गया। इसी तरह विधायक के नाम पर मौजूदा वित्तीय वर्ष में पिनेक्ची तोक में भूमि विकास का कार्य दिखाया गया है।

11 कार्यों में हुआ भुगतान

ग्राम पंचायत रेक्चा के 1 जॉब कार्ड के तहत कुल 11 कार्यों में 22962 रुपए का भुगतान दर्ज है। विधायक बनने के बाद तीन कार्यों में उनके खाते में 5214 रुपए पहुंचे हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2022 से अब तक वृक्षारोपण, भूमि विकास तथा पीसीसी खड़ंजा निर्माण जैसे कार्यों में ये भुगतान किए गए, जिससे सवाल उठने लगे हैं कि मनरेगा के तहत मजदूरी ऐसे लोगों को कैसे दी जा रही है जो स्वयं मजदूरी नहीं करते।

मस्टरोल पर हस्ताक्षर से इनकार

मनरेगा सहायक का कहना है कि विधायक व उनकी पत्नी के हस्ताक्षर मस्टरोल पर नहीं हैं। जब उनसे मस्टरोल के हस्ताक्षर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इससे साफ इनकार कर दिया। अधिकारी का कहना है कि मस्टरोल और फाइल नहीं मिलने के कारण भी जांच में बाधा आ रही है, जिससे मामला और उलझता जा रहा है। ब्लॉक कार्यालय ने सभी संबंधित रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं।

बीडीओ ने कही रिकवरी की बात

खंड विकास अधिकारी का कहना है कि व्यवस्था तोड़ी गई है और जिन लोगों को मजदूरी दी गई है, उनका भुगतान रिकवरी कर सरकारी खजाने में वापस किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रिकवरी प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी और दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई भी होगी। ब्लॉक स्तर पर इस मामले को लेकर सभी जरूरी दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं।

विधायक ने बताया साजिश

विधायक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है। उनका कहना है कि उनके परिवार ने वर्षों पहले मनरेगा के तहत मजदूरी की है और उन्हें बदनाम करने के लिए यह मामला उछाला गया है। विधायक ने कहा कि वे और उनका परिवार मनरेगा से जुड़ी किसी गड़बड़ी में शामिल नहीं हैं।

मनरेगा नाम बदलने पर भी विवाद

गौरतलब है कि इसी माह केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा का नाम बदलने का निर्णय भी विवाद में रहा। विपक्षी दल ने इसका विरोध किया था और इसे ग्रामीणों के अधिकारों से जोड़कर मुद्दा बनाया था। इस बीच मजदूरी के भुगतान को लेकर उठा यह मामला जनपद में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।