देहरादून। राजधानी में चलने वाले विक्रमों के परमिट को लेकर संचालकों और परिवहन विभाग के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद विभाग ने विक्रमों को सात सवारी और एक चालक वाली कैटेगरी से बदलकर छह सवारी और एक चालक की श्रेणी में लाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। निर्देशों के साथ ही कार्रवाई भी शुरू हो गई है, जिससे नाराज होकर विक्रम यूनियन ने अपने सभी वाहन खड़े कर दिए हैं।
79 विक्रम किए गए सीज
परिवहन विभाग ने अब तक 79 विक्रमों को सीज किया है, जिन्हें शहर के रेंजर्स ग्राउंड और अन्य स्थानों पर पीआरडी जवानों की निगरानी में रखा गया है। संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन का कहना है कि संभाग में चलने वाले सभी विक्रमों को पत्राचार और विज्ञापन के माध्यम से छह प्लस एक करने के लिए कहा गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रमों का चालान काटकर सीज करने की कार्रवाई की जा रही है।
यूनियन ने लगाया मनमानी का आरोप
विक्रम यूनियन के अध्यक्ष सतीश शर्मा का कहना है कि वे पिछले चालीस सालों से विक्रम चला रहे हैं और देहरादून में इनसे सस्ती सवारी कहीं नहीं मिलती। उनका आरोप है कि विभाग ने पहले उन्हें सात प्लस एक का परमिट जारी किया और अब अपनी गलती का बोझ संचालकों पर डाल रहा है। इसमें संचालकों के साथ सरकार के राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।
शहर में पंजीकृत हैं 516 विक्रम
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देहरादून शहर में 516 विक्रम पंजीकृत हैं। पहले इनकी दो श्रेणियां थीं, जिनमें आधे विक्रम सात सवारी और एक चालक की श्रेणी में पंजीकृत थे। अब न्यायालय के आदेश के बाद सभी विक्रमों को छह सवारी और एक चालक की श्रेणी में माना जाएगा, जिससे सीधे तौर पर एक सवारी की क्षमता कम हो गई है और संचालकों की आमदनी प्रभावित हो रही है।
आगे सवारी बैठाने पर जुर्माना
विभाग के अनुसार विक्रम चालक अपने बगल में सवारी नहीं बैठा सकते। इन विक्रमों की फिटनेस तभी मिलेगी, जब चालक के बायीं तरफ का हिस्सा बंद किया जाएगा। अगर किसी विक्रम में आगे सवारी बैठी मिली, तो उस पर बीस हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। ओवरलोडिंग करने पर परमिट की शर्तों के उल्लंघन में भी कार्रवाई होगी।
पुराना है यह विवाद
यह विवाद नया नहीं है। वर्ष 2019 में तत्कालीन आरटीओ ने विक्रमों में आगे वाली सीट निकलवाकर लोहे की रॉड लगाकर केबिन बंद करा दिया था, लेकिन बाद में संचालकों ने रॉड निकालकर दोबारा सवारी बैठानी शुरू कर दी। वर्ष 2021 में परिवहन मुख्यालय के आदेश को न्यायालय ने निरस्त कर दिया था। अब दोबारा उसी मामले में विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है।
31 दिसंबर को हो सकती है सुनवाई
विक्रम महासंघ ने भी इस मामले में न्यायालय में याचिका दायर की है और संभावना जताई जा रही है कि इसमें 31 दिसंबर को सुनवाई हो सकती है। यूनियन का कहना है कि जब तक फैसला नहीं आता, तब तक हड़ताल जारी रह सकती है। हालांकि विभाग का रुख साफ है कि नियमों का पालन कराने की कार्रवाई हर हाल में जारी रहेगी।
प्रदेशभर में आंदोलन की चेतावनी
विक्रम यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर विभाग का यही रवैया रहा, तो विक्रम महासंघ प्रदेशभर में प्रदर्शन करेगा। इससे पहले बुधवार से शुरू हुई हड़ताल के कारण शहर के कई रूटों पर सवारी ले जाने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। स्कूली बच्चों, कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों और दैनिक यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।