बदरीनाथ धाम क्षेत्र में शुक्रवार को एक बार फिर प्रकृति का बड़ा नजारा देखने को मिला, जहां कंचन नाले के ऊपरी हिस्से में स्थित कुबेर पर्वत से ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया। घटना के समय वहां से गुजर रहे लोगों ने इसे अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। दृश्य देखकर धाम में मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, हालांकि प्रशासन ने स्थिति पर पूरा नियंत्रण होने का दावा किया है।
शुक्रवार दोपहर का घटनाक्रम
अमर उजाला के मुताबिक यह हादसा शुक्रवार दोपहर बदरीनाथ क्षेत्र में कंचन नाले के ऊपरी हिस्से में हुआ, जहां कुबेर पर्वत पर जमे बर्फ के विशाल खंड अचानक ढहकर नीचे की ओर खिसक आए। वायरल वीडियो में धूल के बड़े गुबार के साथ बर्फ और चट्टानों का मलबा तेज रफ्तार से नीचे आता हुआ दिखाई देता है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें सतर्क हो गईं और स्थिति का जायजा लेने में जुट गईं।
पुलिस ने कहा सामान्य प्राकृतिक घटना
चमोली पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह एक सामान्य प्राकृतिक घटना है और ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। पुलिस के अनुसार टूटा हुआ ग्लेशियर तथा चट्टान का मलबा एक जगह इकट्ठा हो गया है और इससे किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की है।
डीएम गौरव कुमार का बयान
अमर उजाला के अनुसार जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि कंचन नाले के ऊपरी हिस्से में ग्लेशियर टूटा है, जो एक गैर आबादी वाला क्षेत्र है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना से किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी जारी रखने की बात भी कही गई है।
एसडीएम ने दी स्थिति नियंत्रण की जानकारी
खबर पहाड़ के मुताबिक उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्लेशियर के साथ कुछ चट्टानें भी टूटी हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है और किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि टूटे हुए ग्लेशियर का मलबा कंचनगंगा नाले की ओर आया है, जो निर्जन इलाके में ही जा गिरा।
यात्रा और हाईवे पर कोई असर नहीं
प्रशासन के अनुसार इस घटना से हाईवे पर कोई असर नहीं पड़ा और बदरीनाथ धाम सहित चारधाम यात्रा सुचारु जारी है। पुलिस ने यात्रुओं से निर्धारित मार्ग पर ही चलने और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर रुककर वीडियो बनाने से बचने की सलाह दी है।
इस इलाके में पहले भी आई थी आपदा
खबर पहाड़ के अनुसार कुबेर पर्वत और कंचन नाले का यह इलाका ऊंची हिमालयी चट्टानों से घिरा है और यहां पहले भी ग्लेशियर टूटने की घटनाएं हो चुकी हैं। फरवरी में माणा कैंप के पास हिमस्खलन में 55 मजदूर बर्फ में दब गए थे, जबकि 2021 की चमोली आपदा में रैणी के पास ऋषिगंगा में बाढ़ आई थी। इसीलिए हर ऐसी घटना पर प्रशासन तुरंत अलर्ट हो जाता है।
निगरानी में जुटी प्रशासनिक टीमें
घटना के बाद जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन और पुलिस की टीमों ने क्षेत्र की निगरानी शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक ग्लेशियर से आया मलबा निर्जन क्षेत्र में ही ठहर गया है और अभी किसी गांव या धाम के लिए कोई खतरा नहीं है। मौसम में बदलाव के दौर में ऊंची चोटियों पर बर्फ और चट्टानें खिसकने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, इसलिए प्रशासन ने चौकसी और भी बढ़ा दी है।