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नैनीताल

गन्ना पर्यवेक्षक भर्ती: हाईकोर्ट ने तीन वर्षीय कृषि डिप्लोमा धारकों को माना पात्र, यूकेपीएससी को परिणाम घोषित करने का आदेश

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कृषि अभियांत्रिकी में तीन वर्षीय डिप्लोमा धारकों को गन्ना पर्यवेक्षक पद के लिए पात्र माना और यूकेपीएससी को परिणाम घोषित करने का आदेश दिया।

नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गन्ना पर्यवेक्षक भर्ती से जुड़े लंबे विवाद में बड़ा फैसला दिया है। भाषा के अनुसार उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को कहा कि कृषि अभियांत्रिकी में तीन वर्षीय डिप्लोमा धारक उम्मीदवार गन्ना पर्यवेक्षक पदों के लिए पात्र हैं। अदालत ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को अपीलकर्ताओं के परिणाम तुरंत घोषित करने का निर्देश भी दिया। अमर उजाला के मुताबिक इस फैसले से भर्ती परीक्षा में शामिल हुए डिप्लोमा धारक उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है।

भर्ती विवाद की पृष्ठभूमि

दरअसल, गन्ना पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा के बाद तीन वर्षीय कृषि अभियांत्रिकी डिप्लोमा वाले कुछ उम्मीदवारों को चयन सूची में शामिल किया गया था। दस्तावेज सत्यापन के दौरान उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया, जिसके विरोध में प्रभावित उम्मीदवारों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना था कि उनकी योग्यता भर्ती नियमों के अनुरूप है और उन्हें परीक्षा के बाद अयोग्य ठहराना अनुचित है।

विभाग के निर्देश के बावजूद आयोग का पक्ष

विभाग द्वारा निर्धारित शैक्षिक योग्यता में बदलाव नहीं कर सकती। अदालत की इस टिप्पणी से साफ है कि भर्ती प्रक्रिया में आयोग की भूमिका संचालन तक सीमित मानी गई है। कानूनी मामलों से जुड़े लोगों के अनुसार यह टिप्पणी आगामी भर्तियों के लिहाज से भी मायने रखती है, क्योंकि इससे आयोग और विभागों के बीच जिम्मेदारी की सीमा साफ हुई है।

चीनी उद्योग विभाग की भर्ती

गन्ना पर्यवेक्षक के पद चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के अधीन आते हैं और इनकी भर्ती उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के जरिए कराई जाती है। अमर उजाला के अनुसार विभाग की ओर से आयोग को समय के साथ निर्देश दिए गए थे, लेकिन चयन प्रक्रिया अटकी रही। भाषा की रिपोर्ट में भी विभाग और आयोग के बीच जिम्मेदारी के बंटवारे का जिक्र है, जो इस पूरे विवाद की जड़ रहा।

एकल पीठ का आदेश रद्द

अमर उजाला के मुताबिक एकल पीठ के एक सितंबर के आदेश को खारिज करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि कृषि अभियांत्रिकी में तीन वर्षीय डिप्लोमा धारक उम्मीदवार गन्ना पर्यवेक्षक पद के लिए योग्य हैं। भाषा के अनुसार यह फैसला मंगलवार को आया। बेंच ने आयोग को अपीलकर्ताओं के परिणाम तुरंत घोषित करने का आदेश दिया। इस फैसले से उन उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच गई है, जिन्हें दस्तावेज सत्यापन में रोका गया था।

योग्यता तय करने का अधिकार विभाग का

भाषा के अनुसार उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भर्ती के लिए शैक्षिक योग्यता निर्धारित करने का अधिकार नियोक्ता विभाग के पास है, न कि भर्ती एजेंसी के पास। अदालत ने कहा कि भर्ती एजेंसी विभाग द्वारा निर्धारित शैक्षिक योग्यता में बदलाव नहीं कर सकती। कानूनी मामलों से जुड़े लोगों के अनुसार यह टिप्पणी आगामी भर्तियों के लिहाज से भी मायने रखती है, क्योंकि इससे आयोग और विभागों के बीच जिम्मेदारी की सीमा साफ हुई है।

उम्मीदवारों को राहत

फैसले से तीन वर्षीय डिप्लोमा धारक उम्मीदवारों को सीधा लाभ मिला है, जो लंबे समय से अपनी पात्रता को लेकर संघर्ष कर रहे थे। अब आयोग के पास अपीलकर्ताओं के परिणाम शीघ्र घोषित करने का निर्देश है, जिसके बाद चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति का रास्ता मिल सकेगा। मामले पर आयोग की ओर से अभी सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है और आगे की कार्यवाही का इंतजार है।