रुद्रप्रयाग। नगर पालिका में भ्रष्टाचार के आरोपों ने जिले की राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। आरोपों से आहत पार्षदों ने पालिका की बोर्ड बैठक का बहिष्कार कर दिया और मामला जिला प्रशासन तक पहुंच गया। जिलाधिकारी के मुताबिक आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए गए हैं और पालिका से जुड़े अभिलेख खंगाले जा रहे हैं।
डीएम से मिले पांच सभासद
रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते गुरुवार को पांच सभासदों का दल जिलाधिकारी से मिला। सभासद अंकुर खन्ना, सुरेंद्र रावत, किरन पंवार, रवीना देवी और नरेन्द्र सिंह रावत ने पालिका के कामकाज में अनियमितता की शिकायत करते हुए कहा कि जब तक कार्यों की जांच के लिए जांच समिति गठित नहीं होती, तब तक वे बोर्ड बैठकों का अनिश्चितकाल तक बहिष्कार जारी रखेंगे। जिलाधिकारी ने सभासदों को जांच समिति गठित करने का भरोसा दिया और मामले की जांच के निर्देश एसडीएम को दे दिए हैं।
गड़बड़ी के शक
- बजट पास कराए बिना करोड़ों के भुगतान और टेंडर कराए जाने का आरोप
- जैम पोर्टल से बचकर लाखों रुपये के सामान की खरीद का शक
- टेंडर के बिना दुकानों का आवंटन और समिति गठन के बिना निर्माण व सामान की खरीद
- सदस्यों के सवालों पर अधिशासी अधिकारी द्वारा गुमराह करने का आरोप
बजट और टेंडर को लेकर सवाल
सभासदों का आरोप है कि पालिका में बोर्ड को विश्वास में लिए बिना काम कराए जा रहे हैं। बजट पास कराए बिना करोड़ों रुपये के भुगतान और टेंडर किए जा रहे हैं, जबकि सरकारी खरीद के लिए जरूरी जैम पोर्टल से बचकर लाखों रुपये के सामान की खरीद का भी मामला सामने आया है। पार्षदों का कहना है कि दुकानों का आवंटन बिना टेंडर किया गया और निर्माण कार्य तथा सामान की खरीद के लिए समिति गठन तक नहीं होने दिया गया। फिलहाल ये सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और किसी पर अंतिम मुहर नहीं लगाई जा सकती।
23 अप्रैल का पत्र और बैठकों का विवाद
रिपोर्ट्स के मुताबिक सभासद ये मुद्दे पहले भी उठा चुके हैं। 23 अप्रैल को सदस्यों ने पत्र के जरिए अधिशासी अधिकारी को अवगत कराया था कि इन बिंदुओं पर सुधार न होने तक बोर्ड बैठक का बहिष्कार जारी रहेगा। सभासदों का आरोप है कि इस पत्र का जवाब नहीं दिया गया और दो बोर्ड बैठकें बुला दी गईं, जिनके एजेंडे में इस पत्र पर चर्चा को जगह नहीं दी गई। इससे आक्रोशित सदस्यों ने जांच समिति के गठन तक बहिष्कार अनिश्चितकाल तक जारी रखने का निर्णय लिया है।
पालिका की जिम्मेदारियां
नगर पालिकाओं के पास शहर की सड़कें, पेयजल, सफाई, नाली-निर्माण और बाजार की व्यवस्था जैसी बुनियादी जिम्मेदारियां होती हैं। ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही न होने पर आम नागरिकों को सुविधाओं का सीधा नुकसान उठाना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नगरीय निकायों में विकास बजट का सही इस्तेमाल और रिकॉर्ड की पारदर्शी व्यवस्था ही ऐसे विवादों से बचाव का रास्ता है।
एसडीएम स्तर पर जांच का दायरा
जिलाधिकारी के मुताबिक जांच एसडीएम स्तर पर होगी, जिसमें पालिका की फाइलों के साथ बजट पासिंग, टेंडर आवंटन और खरीद से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों को रिकॉर्ड और फाइलों की जांच के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आरोपों के पीछे की हकीकत सामने आ सके। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हीं के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। स्थानीय लोगों और पार्षदों ने उम्मीद जताई है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और जिम्मेदारी तय होगी, ताकि शहर के विकास कार्यों पर कोई सवाल न उठे।