चमोली जिले में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। रविवार सुबह 10 बजकर 27 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.7 मापी गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक भूकंप की गहराई पांच किलोमीटर रही। झटकों से लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए और कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कहां रहा भूकंप का केंद्र
जानकारी के मुताबिक भूकंप का केंद्र चमोली के जमीन के पांच किलोमीटर नीचे रहा। जिले के नारायणबगड़ क्षेत्र में आए इस भूकंप का असर कर्णप्रयाग, नारायणबगड़, थराली और देवाल क्षेत्रों में भी महसूस किया गया। चमोली आपदा प्रबंधन के मुताबिक झटकों का असर पूरे राज्य में देखने को मिला।
कोई नुकसान नहीं
आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बताया कि भूकंप का केंद्र चमोली के आसपास रहा। फिलहाल कहीं से किसी नुकसान की सूचना नहीं है। भूकंप के बाद अधिकारियों को अलर्ट पर रखा गया और सभी क्षेत्रों से जानकारी जुटाई गई। स्थिति सामान्य होने की पुष्टि के बाद राहत की सांस ली गई।
एक महीने में दूसरी बार
यह इस साल एक महीने में दूसरी बार है जब उत्तराखंड में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इससे पहले 9 नवंबर को भी झटके रिकॉर्ड किए गए थे। लगातार आ रहे हल्के झटकों को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई है। आपदा प्रबंधन की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है।
भूकंप क्यों आते हैं
धरती की सतह मुख्य तौर पर सात बड़ी और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से मिलकर बनी है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। टकराने से प्लेटों के कोने मुड़ जाते हैं और ज्यादा दबाव पड़ने पर ये टूटने लगती हैं। इसके बाद नीचे से निकली ऊर्जा बाहर निकलने का रास्ता खोजती है और इसी डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
उत्तराखंड है संवेदनशील श्रेणी में
उत्तराखंड भूकंप के सबसे ज्यादा खतरे वाले क्षेत्र में शामिल है। देश का करीब 61 प्रतिशत हिस्सा भूकंप के खतरे की श्रेणी में आता है। भारतीय मानक ब्यूरो की ओर से जारी नए भूकंपीय जोनेशन मानचित्र में पूरे हिमालयी क्षेत्र को पहली बार सबसे अधिक खतरे वाले जोन-छह में रखा गया है, जिसमें उत्तराखंड का पूरा क्षेत्र शामिल है।
सतर्कता बढ़ाने के निर्देश
आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जिला प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से अपील की गई है कि भूकंप के झटके महसूस होने पर घबराएं नहीं और सुरक्षित स्थान पर जाएं। पुराने और कमजोर भवनों के निरीक्षण की भी बात कही गई है।
पहाड़ में लगातार आ रहे हैं झटके
आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पहाड़ी जिलों में हल्के भूकंप के झटके आते रहते हैं, लेकिन इनका संबंध सीधे किसी बड़े भूकंप से नहीं जोड़ा जाता। विशेषज्ञों की मानें तो लगातार हो रही ये छोटी गतिविधियां भी सतर्कता बढ़ाने का संकेत हैं। भूकंप की गहराई कम होने के कारण इनका असर दूर तक महसूस होता है। इसी कारण आसपास के क्षेत्रों में भी लोगों को झटके महसूस हुए।