चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया के तहत 2003 की मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इसे मुख्य निर्वाचन अधिकारी देहरादून कार्यालय ने वेबसाइट ceo.uk.gov.in पर उपलब्ध करा दिया है। मतदाता अपने पुराने इपिक नंबर से अपना नाम खोज सकते हैं। अगर इपिक नंबर उपलब्ध नहीं है, तो एडवांस सर्च में नाम, पिता का नाम, उम्र और पोलिंग स्टेशन की जानकारी दर्ज कर खोज की जा सकती है।
पुरानी सीटें अब अस्तित्व में नहीं
इस सूची में अपना नाम खोजना आसान नहीं है, क्योंकि उस समय की 18 विधानसभा सीटें आज अस्तित्व में ही नहीं हैं। परिसीमन के बाद इन सीटों के नाम और क्षेत्र पूरी तरह बदल चुके हैं। उदाहरण के तौर पर आज धर्मपुर, रायपुर समेत कई सीटें 2003 में नहीं थीं। उस समय मौजूद कई सीटें अब इतिहास हो चुकी हैं।
SIR में क्यों जरूरी है यह सूची
यह प्रक्रिया SIR में दस्तावेज मिलान के लिए जरूरी है। पुराने भौगोलिक ढांचे के कारण यह काम आम मतदाता के लिए आसान नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक मतदाता को अपनी पुरानी सूची में दर्ज विवरण और वर्तमान दस्तावेजों का मिलान करना होगा। इसमें नाम, पता और पोलिंग स्टेशन से जुड़ी जानकारी की जांच की जानी है।
लाखों मतदाता हो सकते हैं परेशान
अधिकारियों का मानना है कि सूची जारी होने के बाद लाखों मतदाताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वजह यह है कि बहुत से लोगों को अपने पुराने इपिक नंबर याद नहीं होंगे और कई लोगों के पास पुराने दस्तावेज भी नहीं हैं। ऐसे मतदाताओं को नाम खोजने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी।
18 सीटों में आएगी दिक्कत
जिन 18 विधानसभा सीटों का नाम व क्षेत्र परिसीमन के बाद बदल गया है, उन इलाकों के मतदाताओं को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की पुरानी एंट्री नई सीटों के रिकॉर्ड से नहीं मिल रही। इससे दस्तावेज मिलान की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
मिलान प्रक्रिया पर नजर
चुनाव विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि सूची को इस तरह तैयार किया गया है कि मतदाता अपने पुराने विवरण का मिलान कर सकें। इसके लिए वेबसाइट पर खोज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अगर मतदाता को अपना नाम नहीं मिलता, तो उसे संबंधित बीएलओ से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
क्यों पड़ी जरूरत
SIR प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची को अद्यतन और दोहराव से मुक्त करना है। इस प्रक्रिया के तहत पुराने और नए रिकॉर्ड का मिलान किया जाता है। अधिकारियों के मुताबिक सूची जारी करने का उद्देश्य मतदाताओं को अपने पुराने रिकॉर्ड तक पहुंच देना है, ताकि दस्तावेज मिलान में कठिनाई न हो। सूची से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए मतदाता संबंधित कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं।
बीएलओ से मिलेगा सहयोग
अगर किसी मतदाता को वेबसाइट पर अपना नाम नहीं मिलता है, तो उसे संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर से संपर्क करना होगा। अधिकारियों के मुताबिक पुराने रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी बीएलओ के पास भी उपलब्ध रहती है। इससे दस्तावेज मिलान की प्रक्रिया में मतदाताओं को मदद मिलेगी और भ्रम की स्थिति कम होगी।