शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 देहरादून, उत्तराखंड
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देहरादून

रिस्पना-बिंदाल किनारे बस्तियों पर मंडरा रहा बुलडोजर, हजारों परिवारों का भविष्य अनिश्चित

देहरादून में रिस्पना और बिंदाल नदियों के किनारे बसी मलिन बस्तियों पर बुलडोजर चलने की तलवार लटक गई है। 2016 के बाद के सभी निर्माण ध्वस्त किए जाने हैं।

देहरादून की प्रमुख नदियों के किनारों पर तेजी से फैली मलिन बस्तियों पर बुलडोजर चलने की तलवार लटक गई है। रिस्पना और बिंदाल नदी तंत्र के किनारे बीते दो दशकों में हजारों कच्चे मकान और झुग्गियां बन गई हैं। हाईकोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों के क्रम में इन बस्तियों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है, जिससे हजारों परिवारों का भविष्य दांव पर लगा है।

2016 के बाद के निर्माणों पर होगी कार्रवाई

अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2016 के बाद किए गए सभी निर्माणों को ध्वस्त किया जाना है। इसके अलावा 2016 से पूर्व के निर्माण भी यदि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में हैं, तो उन्हें भी हटाया जाएगा। जिलाधिकारी सविन बंसल की ओर से छह माह पहले विभिन्न विभागों के साथ की गई बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि रिस्पना-बिंदाल नदी तंत्र को अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा।

पुनर्वास की कोई ठोस योजना नहीं

सबसे बड़ी चुनौती हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की है। इसके लिए आज तक कोई व्यापक योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। पिछले वर्षों में बस्तियों को हटाने की योजनाएं वोट बैंक की राजनीति के कारण पूरी तरह आगे नहीं बढ़ पाईं। सरकारों के पास न पर्याप्त संसाधन रहे और न ही कोई दीर्घकालिक पुनर्वास नीति तैयार हुई।

249 बस्तियों के विस्तार की कहानी

उत्तराखंड राज्य गठन के बाद दून में मलिन बस्तियों का विस्तार तेजी से हुआ। पिछले 25 वर्षों में इनका फैलाव इतना बढ़ गया कि कई स्थानों पर नदी तंत्र ही बाधित हो चुका है। इस दौरान हजारों हेक्टेयर सरकारी भूमि कब्जे की भेंट चढ़ गई। नगर निगम की करीब 7,800 हेक्टेयर भूमि में से अब सिर्फ 240 हेक्टेयर ही बची है।

आवास योजना से नहीं हो पाएगी भरपाई

सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कुछ बस्तियों के पुनर्वास का प्रस्ताव रखा है। इसमें ब्रह्मपुरी फेज-दो में 421 और काठबंगला में 148 आवास बनाए जा रहे हैं। फिलहाल काठबंगला के निर्माणाधीन फ्लैटों में केवल कुछ दर्जन परिवारों की ही व्यवस्था हो पाएगी। शेष हजारों लोगों के लिए अभी कोई ठोस इंतजाम नहीं है।

छोटे अभियान चल चुके हैं

नगर निगम और एमडीडीए पूर्व में छोटे स्तर पर कई बार अभियान चला चुके हैं। कुछ अवैध निर्माण गिराए भी गए, लेकिन बड़ी संख्या में मौजूद निर्माणों पर कार्रवाई अभी बाकी है। अधिकारियों का कहना है कि चिह्नित निर्माणों की सूची तैयार की जा रही है और विभागीय स्तर पर कार्ययोजना बनाई जा रही है।

विरोध की आशंका

बस्तियों में रहने वाले परिवारों का कहना है कि पहले उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी जताई जा रही है कि कार्रवाई शुरू होने पर विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि किसी भी कार्रवाई से पहले स्थानीय लोगों को विश्वास में लिया जाएगा।

निगरानी के निर्देश

प्रशासन का कहना है कि नदी किनारे नई निर्माण गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। जोनिंग के दायरे में आने वाले क्षेत्रों की नियमित निगरानी की जाएगी और नए निर्माणों को रोकने के लिए संयुक्त टीमें गठित की गई हैं। संबंधित विभागों को चिह्नित निर्माणों की सूची अद्यतन करने के निर्देश दिए गए हैं।