नैनीताल हाईकोर्ट शिफ्टिंग के मामले में बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड की ओर से हल्द्वानी के गौलापार में खरीदी गई भूमि को बेचने के प्रस्ताव पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में इस मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने प्रस्ताव पर रोक लगाते हुए बार काउंसिल को चार हफ्ते के भीतर अपना जवाब पेश करने का आदेश दिया है।
बार काउंसिल ने खरीदी थी भूमि
मामले के मुताबिक जब हाईकोर्ट को हल्द्वानी के गौलापार में शिफ्ट करने की चर्चाएं चल रही थीं, तब हाईकोर्ट ने भी इस पर आदेश दे दिया था। केंद्र, राज्य सरकार और न्याय विभाग ने भी हाईकोर्ट को गौलापार शिफ्ट करने पर अपनी सहमति जताई थी। इसी क्रम में बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड ने अपने कार्यालय को शिफ्ट करने के लिए गौलापार में दो हजार स्क्वायर फीट जमीन खरीदी।
शिलान्यास और स्वीकृति
खरीदी गई इस भूमि पर कार्यालय बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिलान्यास किया था। निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए गए थे। इसी क्रम में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।
बार काउंसिल ने पास किया था प्रस्ताव
बीती 26 अगस्त 2024 को बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड ने एक प्रस्ताव पास कर निर्णय लिया था कि अब इस भूमि की उन्हें आवश्यकता नहीं है। काउंसिल का कहना था कि अब हाईकोर्ट हल्द्वानी शिफ्ट नहीं होगा, इसलिए जमीन को बेचा जाए। इसे लेकर अधिवक्ताओं ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस प्रस्ताव को चुनौती दी।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष
अधिवक्ता उज्ज्वल सुनाल और पृथ्वी लमगड़िया की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट शिफ्टिंग का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और इस पर अंतिम निर्णय नहीं आया है। याचिका में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से दिए गए जवाब में केंद्र, राज्य और न्यायपालिका की संस्तुति का उल्लेख है।
किस आधार पर बेचेगी काउंसिल
याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब तक हाईकोर्ट शिफ्टिंग के मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं आया, तब किस आधार पर बार काउंसिल यह कह सकती है कि हाईकोर्ट शिफ्ट नहीं होगा। इस आधार पर उन्होंने मांग की कि बार काउंसिल की भूमि को बेचने के प्रस्ताव पर रोक लगाई जाए।
चार हफ्ते में जवाब देने का आदेश
सुनवाई के बाद अदालत ने भूमि बिक्री के प्रस्ताव पर रोक लगा दी और बार काउंसिल को चार हफ्ते में अपना पक्ष रखने का मौका दिया। इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं को प्रति शपथ पत्र देने के आदेश भी दिए गए हैं। अब मामले की अगली सुनवाई में दोनों पक्षों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
बार काउंसिल का पक्ष
बार काउंसिल की ओर से कहा गया है कि सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद यह आदेश दिया है। काउंसिल के पदाधिकारियों का कहना है कि वह अदालत के आदेश का पालन करेगी और तय अवधि में अपना जवाब पेश करेगी। सुनवाई में अदालत ने मामले से जुड़े सभी तथ्यों पर गौर किया।