पौड़ी। लोक निर्माण विभाग के मुताबिक जिले में लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से 28 किलोमीटर राजमार्ग को गड्ढा मुक्त कर दिया गया है। मानसून में क्षतिग्रस्त हुए हिस्सों की मरम्मत के बाद अब इन सड़कों पर आवाजाही सुगम हो गई है। इस दौरान सड़क की टूटी सतहें दोबारा भरी गईं और आने-जाने वाले वाहनों को अब वही रफ्तार मिल रही है जो बारिश का मौसम शुरू होने से पहले हुआ करती थी।
मानसून हर साल पहाड़ की सड़कों की कसौटी होता है। लगातार बारिश से सड़क की ऊपरी सतह टूटती है, किनारे धंसते हैं और कई जगहों पर मलबा आ जाता है। जहां बारिश का पानी सड़क पर ठहरता है, वहीं से गड्ढे शुरू होते हैं — छोटा गड्ढा समय पर न भरा जाए तो पानी उसे बड़ा करता जाता है और फिर पूरा फलक ही उखड़ जाता है। नालियों के बंद होने से हालत और बिगड़ती है, क्योंकि पानी का रास्ता न मिलने पर वह सड़क की सतह पर ही अपना रास्ता बनाता है। यही वजह है कि बारिश का मौसम बीतते ही मरम्मत का काम हर पहाड़ी जिले की प्राथमिकता बन जाता है।
जीवनरेखा हैं पहाड़ की सड़कें
पहाड़ी इलाकों में सड़क सिर्फ आने-जाने का जरिया नहीं, रोजी-रोटी से जोड़ने वाला रास्ता है। गांव से बाजार तक सब्जी, दूध और खेती की उपज पहुंचाना हो, स्कूल-कॉलेज की बसों का चलना हो या बीमार को अस्पताल ले जाना हो — हर काम सड़क से तय होता है। गड्ढों भरी सड़क पर वाहनों को समय ज्यादा लगता है, ईंधन की खपत बढ़ती है और दुर्घटना का खतरा भी गहरा जाता है। खासकर एंबुलेंस और यात्रियों से भरी बसों के लिए खराब सड़कें सिरदर्द बन जाती हैं। दूरस्थ गांवों से तो यह और भी ज्यादा जुड़ा है, जहां एक ही सड़क पर पूरे इलाके की उम्मीदें टिकी होती हैं। इसीलिए गड्ढा मुक्त सड़क की खबर क्षेत्र के लोगों के लिए राहत की खबर है।
विभाग की ओर से आगे की तैयारी
लोक निर्माण विभाग का कहना है कि अगले चरण में जिले की बाकी सड़कों को भी दुरुस्त किया जाएगा। ग्रामीण सड़कों की मरम्मत के लिए भी बजट जारी किया जा चुका है, ताकि मुख्य राजमार्गों के अलावा गांवों को जोड़ने वाले रास्तों पर भी काम हो सके। अधिकारियों का कहना है कि काम की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, क्योंकि टिकाऊ मरम्मत ही असली फायदा देती है। अनुभव यह रहा है कि मरम्मत के साथ नालियों की सफाई और जल-निकासी का ध्यान रखा जाए तो सड़कें अगली बारीश में भी बेहतर टिकती हैं।
स्थानीय लोगों की अपेक्षा
सड़कों के सुधरने से क्षेत्र के लोगों में खुशी है, लेकिन उम्मीद भी जुड़ी है कि यह काम सिर्फ कागज पर न रहे। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मरम्मत की गुणवत्ता बनी रहे तो आने वाले समय में सड़कें जल्दी नहीं टूटेंगी और आवाजाही में लगातार सुधार आता रहेगा। बाजार तक सामान ले जाने वाले चालकों का कहना है कि दुरुस्त सड़क से उनकी गाड़ियों की मरम्मत और ईंधन दोनों का खर्च घटेगा। स्कूली बसों और सार्वजनिक वाहनों के समय में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। अब देखना है कि विभाग का यह अभियान बाकी सड़कों तक भी उसी गति से पहुंचता है या नहीं।