देहरादून। इस साल की चारधाम यात्रा नया रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रही है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 45 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने चारों धामों के दर्शन कर लिए हैं। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री — चारों धामों में आस्था का सैलाब उमड़ा है और मानसून की बाधाओं के बावजूद यात्रा लगातार चलती रही। रिपोर्ट के मुताबिक मानसून की विदाई के बाद यात्रा ने फिर रफ्तार पकड़ी है और उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल का आंकड़ा पिछले साल के रिकॉर्ड को पार कर सकता है।
मानसून के बाद बढ़ी आवाजाही
पहाड़ों में मानसून के दौरान बारिश और भूस्खलन के चलते आवाजाही पर बार-बार असर पड़ता रहा, लेकिन इस बार यात्रा रुकी नहीं। मौसम साफ होते ही धामों की ओर श्रद्धालुओं की संख्या दोबारा बढ़ने लगी। पर्यटन विभाग की तरफ से तिथिवार दर्ज आंकड़ों में दर्शनार्थियों की गिनती लगातार बढ़ रही है। स्थानीय कारोबारियों के लिए श्रद्धालुओं की यह भीड़ सीजन का मुख्य सहारा है, क्योंकि धामों और रास्ते के ठहराव स्थलों का होटल, भोजनालय और पालकी-खच्चर का कारोबार इसी पर टिका है।
हेलीकॉप्टर किराये में 49 प्रतिशत बढ़ोतरी
यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवा का किराया 49 प्रतिशत तक बढ़ गया था, जिसकी खबरें सितंबर की शुरुआत में बड़े पैमाने पर चर्चा में रहीं। केदारनाथ धाम के लिए हेली सेवा के किराए में इजाफे से श्रद्धालुओं का खर्च बढ़ गया। कई श्रद्धालु ऐसे भी रहे, जिन्होंने महंगाई के चलते सेवा से दूरी बना ली और सड़क मार्ग से ही यात्रा पूरी की।
DGCA की रोक और उसकी वापसी
किराया बढ़ोतरी और सेवा में रुकावट की शिकायतों के बीच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) का दखल रहा। अगस्त के आखिर में नियमों के अनुपालन की जांच के चलते हेली शटल सेवा पर रोक लगाई गई थी, जिसके असर से यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। बाद में यह रोक हटा ली गई, जिसके बाद सेवा फिर से चलने लगी। माना जा रहा है कि रोक का मकसद सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना था। हेली सेवा बुजुर्ग और बीमार श्रद्धालुओं के लिए बड़ा सहारा है, इसलिए उड़ानें बहाल होने से उन्हें दिलासा मिला।
धामों पर प्रबंधन और तैयारियां
- भीड़ प्रबंधन के लिए धामों पर पुलिस और मेडिकल टीमें तैनात रहीं
- बारिश और भूस्खलन से बंद हुए मार्ग BRO और लोक निर्माण विभाग ने जल्द खोले
- रजिस्ट्रेशन और इ-पास व्यवस्था से भीड़ को नियंत्रित रखा गया
- मौसम खराब होने पर यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने के निर्देश लागू रहे
चारों धामों में से केदारनाथ रुद्रप्रयाग जिले में, बदरीनाथ चमोली में और गंगोत्री-यमुनोत्री उत्तरकाशी जिले में स्थित हैं। यात्रा का असर सिर्फ धामों तक सीमित नहीं रहता, रास्ते के हरिद्वार, ऋषिकेश और आगे के पड़ावों का कारोबार भी श्रद्धालुओं से चलता है। अगर इस साल का आंकड़ा पिछले साल के रिकॉर्ड को पार कर जाता है तो सीजन के आखिरी दिनों में पहाड़ की अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलेगी। प्रशासन का फोकस इस वक्त यही है कि सीजन शांतिपूर्वक और सुरक्षित तरीके से पूरा हो।