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देहरादून

यूकेएसएससी स्नातक स्तरीय परीक्षा पर पेपर लीक का आरोप, देहरादून में लागू हुई धारा 163

स्नातक स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक के आरोप के बाद देहरादून में उतरे बेरोजगार युवा, जांच की मांग। प्रशासन ने शहर के संवेदनशील इलाकों में धारा 163 लागू की।

देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएससी) की स्नातक स्तरीय लिखित परीक्षा पर पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद राजधानी में हालात गरमा गए हैं। बेरोजगार युवाओं ने सड़कों पर उतरकर जांच सीबीआई से कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है, जिसके बीच जिला प्रशासन को देहरादून के संवेदनशील इलाकों में धारा 163 लागू करनी पड़ी है। पुलिस के मुताबिक नकल गिरोह से जुड़े एक आरोपी को परीक्षा से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था और मामले की छानबीन जारी है।

परीक्षा और आयोग की तैयारी

आयोग की 19 सितंबर 2025 को जारी विज्ञप्ति संख्या 3173/परीक्षा-विविध/2023-24 के अनुसार स्नातक स्तरीय (पटवारी, लेखपाल एवं अन्य पदों) की लिखित प्रतियोगी परीक्षा 21 सितंबर 2025 को एक ही पाली में दोपहर 11:00 से 1:00 बजे तक आयोजित हुई। विज्ञप्ति में आयोग ने बताया था कि परीक्षा से पहले तक लगभग 80 प्रतिशत अभ्यर्थी अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर चुके थे और आयोजन की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। अभ्यर्थियों को समय पर केंद्र पहुंचने और मौसम को देखते हुए सावधानी रखने की सलाह भी दी गई थी। इस विज्ञप्ति पर आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बर्णवाल के हस्ताक्षर हैं।

आरोप और गिरफ्तारी

परीक्षा के दिन से ही आरोप लग रहे हैं कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही बाहर पहुंच गया था और मोटी रकम लेकर कुछ अभ्यर्थियों को उत्तर उपलब्ध कराए जा रहे थे। पुलिस के मुताबिक नकल गिरोह से जुड़े एक आरोपी को परीक्षा से पहले गिरफ्तार किया गया। पटवारी और लेखपाल जैसे पदों की यह भर्ती राज्य में सबसे चर्चित सरकारी नौकरियों में गिनी जाती है, इसलिए इन खबरों का असर तैयारी कर रहे युवाओं तक सीधे पहुंचा और आक्रोश तेज हो गया।

देहरादून में प्रदर्शन और धारा 163

22 सितंबर 2025 को उत्तराखंड बेरोजगार संघ के आह्वान पर देहरादून में बड़ा प्रदर्शन हुआ। बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरे और आयोग तथा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने शहर के संवेदनशील इलाकों में धारा 163 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) लागू कर दी। इस धारा के तहत किसी इलाके में पांच या उससे अधिक लोगों के एक साथ इकट्ठा होने पर रोक लगाई जा सकती है।

जांच और कार्रवाई की मांग

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में पेपर लीक की जांच सीबीआई से कराना, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जांच पूरी होने तक परीक्षा का परिणाम टालना शामिल है। युवाओं ने साफ कहा है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि जांच की रिपोर्ट आने से पहले परिणाम जारी करना ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा।

परिणाम और जांच का इंतजार

अभी तक आयोग की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने की कोई घोषणा नहीं हुई है और न ही परिणाम की तारीख तय हुई है। सरकार और आयोग के अगले फैसले पर तय होगा कि इस भर्ती का रास्ता दोबारा परीक्षा की ओर जाएगा या जांच के बाद आगे बढ़ेगा। उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता के मुद्दे पहले भी युवाओं को आहत कर चुके हैं, इसलिए इस बार सबकी नजरें जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।