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नैनीताल

हाईकोर्ट का आदेश: टाटा मैजिक बस का परमिट निरस्त, सुरक्षा सर्वोपरि

सड़क सुरक्षा के एक अहम मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने टाटा मैजिक बस का परमिट अगली सुनवाई तक निरस्त रखा। पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षा सबसे ऊपर है।

नैनीताल। सड़क सुरक्षा से जुड़े एक अहम मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने टाटा मैजिक बस, जिसे इलाके के लोग ‘छोटा हाथी’ के नाम से जानते हैं, का परमिट अगली सुनवाई तक निरस्त रखने का आदेश दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी हालत में समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत के इस रुख के बाद पहाड़ी मार्गों पर चलने वाली छोटी सवारी गाड़ियों के संचालन को लेकर निगरानी और कड़ी हो गई है।

पहाड़ों में क्षमता से ज्यादा सवारी बैठाने, ओवरलोडिंग और लापरवाह ड्राइविंग की शिकायतें लगातार उठती रही हैं। इसी कड़ी में इस बस का परमिट निरस्त किया गया था, जिसके बाद मामला अदालत पहुंचा और सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक परमिट निरस्त रखने का अंतरिम आदेश पारित किया। मामले पर आगे की सुनवाई में निर्णय होगा, लेकिन फिलहाल अदालत का संदेश साफ है कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी।

छोटी बसों का पहाड़ी सफर

नैनीताल जैसे पहाड़ी जिले में टाटा मैजिक जैसी छोटी गाड़ियां बरसों से साझा सवारी सेवा की रीढ़ हैं। पतले और घुमावदार रास्तों पर बड़ी बसें आसानी से नहीं घुस पातीं, इसलिए दूर-दराज के गांवों को सड़क से जोड़ने का काम इन्हीं छोटे वाहनों के कंधों पर रहता है। सस्ता किराया और बार-बार मिलने वाली गाड़ियों की वजह से स्कूली बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक रोजमर्रा की आवाजाही के लिए इन्हीं पर निर्भर रहते हैं।

लेकिन यही सुविधा कई बार खतरे का सबब बन जाती है। सीमित सीटों वाली इन गाड़ियों में क्षमता से अधिक सवारी बैठाने के मामले आम तौर पर सामने आते रहते हैं। ढलान भरे और गहरी खाई किनारे चलने वाले रास्तों पर अधिक भार ब्रेक और स्टियरिंग पर सीधा असर डालता है, जिससे गाड़ी अनियंत्रित होने और दुर्घटना होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

ओवरलोडिंग से पहाड़ में बढ़ता जोखिम

पहाड़ों की संकरी सड़कों पर हादसों में एक छोटी सी चूक भी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। समय-समय पर हुई दुर्घटनाओं में ओवरलोडिंग, तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही को बड़े कारणों के रूप में गिनाया गया है। ऐसे में परमिट की शर्तों और क्षमता सीमा का सख्ती से पालन कराना सुरक्षा की पहली कड़ी माना जाता है। हाईकोर्ट भी सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर पहले से सजग दिख रहा है और इसी दृष्टिकोण का असर इस आदेश में भी झलकता है।

अदालती आदेश के बाद विभाग की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट के आदेश के बाद परिवहन विभाग पर निर्देशों का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी आ गई है। विभाग का कहना है कि पहाड़ी मार्गों पर ओवरलोडिंग और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जाएंगे और दोषी चालकों तथा वाहन मालिकों पर कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों के लिए यह आदेश एक संदेश भी है कि रोज की आवाजाही की सुविधा सुरक्षा की कीमत पर नहीं चल सकती। अगली सुनवाई में अदालत जो दिशा तय करेगी, उससे पहाड़ी मार्गों पर छोटी बसों के संचालन के नियमों को लेकर बड़ा रुख साफ हो सकता है। तब तक परिवहन विभाग, चालक और वाहन मालिकों सभी को निगरानी में रहना होगा।