शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 देहरादून, उत्तराखंड
मेरा पहाड़ मेरी पहचान
ब्रेकिंग न्यूज़
20 हजार फीट पर देश का पहला हेली रेस्क्यू, गंगोत्री में 67 पर्वतारोही सुरक्षितअक्तूबर में केदारनाथ आ सकते हैं पीएम मोदी, पुनर्निर्माण कार्यों का लेंगे जायजाकुंभ 2027 की तैयारी: एआई और सर्विलांस से निगरानी, 32 सेक्टर व 10 स्नान पर्वसीएम धामी ने चंपावत में किया विज्ञान केंद्र का निरीक्षण, शारदा नदी फ्रंट प्रोजेक्ट का शिलान्यासचारधाम यात्रा के लिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया शुरू, वाहनों की होगी सख्त जांच
चमोली

चमोली के टिम्मरसैंण महादेव में बर्फ से बना शिवलिंग, बाबा बर्फानी के दर्शन शुरू

चमोली की नीती घाटी में स्थित टिम्मरसैंण महादेव गुफा में बर्फ से बने शिवलिंग के दर्शन शुरू हो गए हैं। दिसंबर से मार्च तक यहां बनने वाला यह शिवलिंग अमरनाथ की याद दिलाता है।

चमोली। चीन सीमा से सटे चमोली जिले की नीती घाटी में स्थित टिम्मरसैंण महादेव गुफा में बर्फ से बने शिवलिंग के दर्शन शुरू हो गए हैं। इस सीजन की पहली बर्फबारी के बाद यहां प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बन गया है, जिस पर पहाड़ से लगातार जलधारा गिरती रहती है। यह दृश्य श्रद्धालुओं को अमरनाथ की गुफा में विराजमान बर्फीले बाबा की याद दिलाता है।

भारत-चीन सीमा के पास स्थित है गुफा

यह मंदिर जोशीमठ से लगभग 100 किलोमीटर दूर, भारत-चीन सीमा पर स्थित अंतिम गांव नीती में है। दुर्गम क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद इस गुफा का महत्व स्थानीय लोगों के साथ-साथ सेना और आईटीबीपी के जवानों के लिए भी विशेष है। ऊंचाई पर बसे इस स्थल तक पहुंचने के लिए लंबा और कठिन रास्ता तय करना पड़ता है।

पैदल पहुंचना पड़ता है गुफा तक

जोशीमठ-मालारी हाईवे से करीब तीन किलोमीटर की पैदल यात्रा करके गुफा तक पहुंचा जा सकता है। जोशीमठ से नीती गांव की दूरी लगभग 75 किलोमीटर है, जहां तक परिवहन की सुविधा उपलब्ध है। रास्ते में बर्फ और ठंडे मौसम के कारण यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।

स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां बाबा बर्फानी सदियों से विराजमान हैं। सर्दियों में बर्फबारी के बाद यहां करीब 10 फीट ऊंचा शिवलिंग बन जाता है, जो बर्फ पिघलने पर अपने मूल आकार में आ जाता है। इसी कारण यह स्थल पहाड़ के लोगों के लिए गहरी आस्था से जुड़ा हुआ है और क्रिसमस तथा नए साल के आसपास यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है।

दूर-दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु

बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। हैदराबाद से आए एक श्रद्धालु ने कहा कि यहां का मौसम सुहावना है और दर्शन करके मन को सुकून मिला। दूसरे श्रद्धालु ने कहा कि यहां आकर कोई भी आसानी से दर्शन कर सकता है और पर्यटन विभाग को इस स्थान पर सौंदर्यीकरण के काम कराने चाहिए।

26.85 करोड़ की लागत से विकास कार्य

जिला पर्यटन अधिकारी अरविंद गौड़ के मुताबिक टिम्मरसैंण गुफा तक पहुंचने के लिए 26.85 करोड़ रुपये की लागत से डेढ़ किलोमीटर ट्रेक, टिन शेड और पार्किंग के निर्माण का काम चल रहा है। गुफा के आसपास सौंदर्यीकरण का कार्य भी कराया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े।

शीतकालीन पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

बर्फ की सफेद चादर से ढकी नीती घाटी और टिम्मरसैंण महादेव की गुफा शीतकालीन पर्यटन के लिए आदर्श स्थल मानी जा रही है। यहां पहुंचने वाले पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ आध्यात्मिक अनुभव भी लेकर लौटते हैं। इस सीजन की पहली बर्फबारी के बाद मौसम सुहावना बना हुआ है, जिससे पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है।

आस्था और पर्यटन का संगम

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि पर्यटन विभाग की ओर से कराए जा रहे विकास कार्यों के पूरा होने से इस स्थल तक पहुंच और सुविधाएं बेहतर होंगी। इससे क्षेत्र में पर्यटन को बल मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह गुफा आस्था और साहसिक पर्यटन दोनों को एक साथ जोड़ती है।