पौड़ी। जिले के चौबट्टाखाल क्षेत्र में लोगों पर हमला करने वाले आदमखोर बाघ के खिलाफ वन विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। बाघ के लगातार हमलों के बाद कैबिनेट मंत्री ने जिलाधिकारी पौड़ी और डीएफओ को पत्र लिखकर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में प्रोफेशनल शूटर तैनात कर दिए हैं और पिंजरे भी लगाए गए हैं।
दो दिन में दो महिलाओं पर बाघ का हमला
13 नवंबर को विकासखंड पोखड़ा के बगड़ीगाड़ गांव की रानी देवी पर बाघ ने हमला किया था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हुईं। इसके ठीक अगले दिन यानी 14 नवंबर को घंडियाल गांव की प्रभा देवी भी बाघ के हमले की शिकार बनीं। दो दिन में दो घटनाओं के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई और ग्रामीणों ने सुरक्षा की मांग तेज कर दी।
मंत्री के हस्तक्षेप के बाद तेज हुई कार्रवाई
कैबिनेट मंत्री ने मामले में खुद हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बाघ के लगातार हमलों को देखते हुए तुरंत अनुमति लेकर प्रोफेशनल शूटर की तैनाती की जाए। संस्तुति के बाद वन विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी। प्रभावित क्षेत्र में गश्त बढ़ाने के साथ ही ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
गुलदार के बाद अब भालू का आतंक
जिले में जंगली जानवरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। जहां कुछ समय पहले तक गुलदार के हमलों से ग्रामीण भयभीत थे, वहीं अब पाबौ, पैठणी, थलीसैंण और बीरोंखाल क्षेत्रों में भालू का आतंक तेजी से फैल रहा है। भालू के आतंक से ग्रामीणों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
मवेशियों से अब लोगों पर हमला
शुरुआत में भालू मवेशियों पर हमला कर उन्हें अपना शिकार बना रहा था, जिससे ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। लेकिन अब भालू लोगों पर भी हमला करने लगे हैं, जिससे स्थिति और चिंताजनक हो गई है। लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही वे घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं।
किसानों और पशुपालकों के सामने संकट
भालू के बढ़ते हमलों से किसानों और पशु पालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण लगातार वन विभाग और जिला प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि जिन इलाकों में भालू और गुलदार का आतंक बढ़ रहा है, वहां सुरक्षा और राहत के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि अन्य इलाकों में भी ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।
कई गांवों में बढ़ाई गई गश्त
जिला प्रशासन और वन विभाग की ओर से प्रभावित गांवों में गश्त बढ़ाई गई है। इन इलाकों में पिंजरे लगाने की प्रक्रिया भी जारी है और वनकर्मी ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
निगरानी बढ़ाने की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाए और रात्रि गश्त के साथ ही जानवरों को भगाने के लिए ठोस उपाय करे। उनका कहना है कि केवल पिंजरे लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, इसके लिए जंगल क्षेत्र में भोजन और पानी की उपलब्धता को लेकर भी अध्ययन किए जाने की जरूरत है।