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उत्तरकाशी

उत्तराखंड में पांच से आठ अक्टूबर तक तेज बारिश का दौर, आठ जिलों में येलो अलर्ट, ऊंची चोटियों पर बर्फबारी के आसार

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक सीएस तोमर ने पांच से आठ अक्टूबर तक तेज बारिश की चेतावनी दी है, आठ जिलों में येलो अलर्ट और ऊंची चोटियों पर बर्फबारी के आसार हैं।

उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। नवभारत टाइम्स और अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक सीएस तोमर ने बताया है कि राज्य में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने के कारण पांच से आठ अक्टूबर तक एक बार फिर तेज दौर की बारिश होने की संभावना है। विभाग ने रविवार को ही इस स्थिति को लेकर अपनी चेतावनी जारी कर दी थी।

निम्न दबाव और पश्चिमी विक्षोभ का असर

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार पोस्ट मानसून के बाद उत्तराखंड में बारिश होती है, लेकिन इस बार निम्न दबाव का क्षेत्र बनने और पश्चिमी विक्षोभ के साथ उसके मिलने से मानसून की पूरी तरह से विदाई नहीं हो पाई है। इसी कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला थम नहीं रहा है। निदेशक सीएस तोमर ने साफ कहा है कि छह और सात अक्टूबर को प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में भारी से भारी बारिश की चेतावनी है।

इन आठ जिलों पर सबसे ज्यादा नजर

मौसम विज्ञान केंद्र ने रविवार को हरिद्वार, देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और नैनीताल में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने, चालीस से पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने और बारिश के अति तीव्र दौर होने की संभावना जताई है। इन जिलों के लिए विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। सोमवार को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, देहरादून और हरिद्वार में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

ऊंची चोटियों पर बर्फबारी और ओलावृष्टि

बारिश के साथ पहाड़ की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी और कहीं-कहीं ओलावृष्टि होने की संभावना है। बारिश के तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर को देखते हुए विभाग ने ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ गिरने से तापमान में तेज गिरावट दर्ज की जा सकती है और मैदानी जिलों में भी ठंडक बढ़ेगी।

ऑरेंज अलर्ट का अर्थ और सावधानी

ऑरेंज अलर्ट का अर्थ है कि मौसम की स्थिति गंभीर हो सकती है और प्रशासन को तैयार रहने की जरूरत है। ऐसे में नदी-नालों के किनारे जाने, भूस्खलन संभावित ढलानों पर रुकने और पुराने मकानों या कच्ची दीवारों के पास ठहरने से बचना चाहिए। बिजली चमकने के साथ तेज हवा चलने पर पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े न होने की सलाह दी जाती है।

पहाड़ी रास्तों पर सतर्कता जरूरी

उत्तराखंड में इस तरह के बारिश के दौर में सबसे ज्यादा दिक्कत आती है पहाड़ी सड़कों पर। लगातार बारिश से मलबा और पत्थर गिरने की घटनाएं बढ़ती हैं, जिससे आवाजाही ठप हो जाती है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले सड़क की हालत की जानकारी लें और प्रशासन की ओर से जारी अपडेट पर नजर रखें।

आठ अक्टूबर के बाद राहत के आसार

विभाग के मुताबिक आठ अक्टूबर तक प्रदेश का मौसम बदला हुआ रहेगा। इस दौर के बाद राज्य में बारिश से राहत मिलने के आसार हैं और मौसम शुष्क होने की संभावना है। हालांकि इस बीच किसानों और बागवानों को अपनी फसल तथा बागों की सुरक्षा के इंतजाम पहले से कर लेने चाहिए।

बदलता पोस्ट मानसून पैटर्न

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक ने कहा है कि पोस्ट मानसून के दौर में बारिश होती है, लेकिन बदले पैटर्न और जलवायु परिवर्तन के असर से इस बार अधिक बारिश दर्ज की जा रही है। यही वजह है कि अक्टूबर का पहला पखवाड़ा भी बारिश के साथ बीत रहा है और ऊंची चोटियों पर बर्फबारी समय से पहले शुरू हो गई है।