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उत्तरकाशी

चमोली में ऊंचाई वाले इलाकों में दो दिन ट्रैकिंग पर रोक, बद्रीनाथ में चालीस साल बाद अक्टूबर में बर्फबारी

प्रशासन ने ऊंचाई वाले इलाकों में दो दिन ट्रैकिंग और निर्माण पर रोक लगाई है। बद्रीनाथ में अक्टूबर की शुरुआत में बर्फबारी ने चालीस साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है।

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम ने समय से पहले दस्तक दे दी है। नवभारत टाइम्स और न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में छह अक्टूबर को कई जिलों में भारी बारिश के साथ ऊपरी चोटियों पर बर्फबारी दर्ज की गई, जिसके चलते चमोली प्रशासन को हिमालयी क्षेत्रों में ट्रैकिंग पर दो दिन की रोक लगानी पड़ी।

आठ जिलों में ऑरेंज अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर, टिहरी और हरिद्वार में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में ओलावृष्टि होने और तीस से चालीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। शेष जिलों के लिए विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है।

चमोली प्रशासन का दो दिन का आदेश

चमोली जिले में लगातार बर्फबारी और बारिश को देखते हुए प्रशासन ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दो दिन के लिए ट्रैकिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी है। साथ ही ऊंचाई वाले इलाकों में निर्माण कार्य कराने की भी अनुमति नहीं दी गई है। यह आदेश स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी किया है।

रोक किन इलाकों पर लागू

यह रोक बद्रीनाथ, केदारनाथ और अलकनंदा घाटी के ऊंचाई वाले हिस्सों सहित नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र पर लागू रहेगी। संबंधित उपजिलाधिकारियों, पर्यटन अधिकारी और निर्माण एजेंसियों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि बर्फबारी और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

बद्रीनाथ में टूटा चालीस साल पुराना रिकॉर्ड

बद्रीनाथ धाम में इस बार अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही बर्फबारी हो गई, जिसने करीब चालीस साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। रिकॉर्ड के मुताबिक आठवें दशक में बद्रीनाथ में अक्टूबर के मध्य में पहली बर्फबारी दर्ज हुई थी। उसके बाद लंबे समय तक अक्टूबर के शुरुआती दिनों में हिमपात नहीं हुआ था। इस बार समय से पहले बर्फ गिरने से स्थानीय लोग और तीर्थयात्री दोनों हैरान हैं।

माणा से नीति तक बर्फ की सफेद चादर

चमोली जिले में माणा पास से लेकर नीति पास तक कई जगहों पर बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। बद्रीनाथ धाम में भी हिमपात शुरू हो गया है और मंदिर पहुंचे तीर्थयात्री बर्फबारी का नजारा देखकर उत्साहित हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में इस इलाके का तापमान और गिर सकता है, जिससे ठंड बढ़ेगी।

तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों पर असर

समय से पहले पड़ी बर्फ ने प्रदेश के ऊपरी हिस्सों में जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बर्फबारी से सड़कों पर फिसलन बढ़ गई है और ऊंचाई वाले गांवों में ठंड बढ़ गई है। वहीं बारिश और ओलावृष्टि से मैदानी इलाकों में भी तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।

आठ अक्टूबर तक बदला रहेगा मौसम

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक राज्य का मौसम आठ अक्टूबर तक बदला हुआ बना रहेगा। इस दौरान ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और मैदानी हिस्सों में बारिश जारी रह सकती है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन की ओर से जारी चेतावनी और सलाह पर लगातार नजर बनाए रखें।

किसानों और बागवानों के लिए सलाह

प्रशासन ने किसानों और बागवानों से कहा है कि वे बारिश और ओलावृष्टि से अपनी फसलों तथा बागों को बचाने के इंतजाम समय रहते कर लें। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पेयजल और ईंधन की व्यवस्था पहले से कर लेने की सलाह दी गई है, ताकि मौसम खराब होने पर परेशानी न उठानी पड़े।