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चमोली

उत्तराखंड के चमोली में भूकंप के झटके, 3.4 तीव्रता के साथ हिली धरती, घरों से बाहर निकले लोग

चमोली जिले में सोमवार शाम छह बजकर 47 मिनट पर रिक्टर स्केल पर 3.4 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए। केंद्र चमोली था और गहराई पांच किलोमीटर दर्ज हुई।

उत्तराखंड के चमोली जिले में सोमवार की शाम धरती डोल उठी। जागरण के मुताबिक शाम छह बजकर 47 मिनट पर भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 3.4 आंकी गई। झटके के साथ ही लोग घबराहट में अपने घरों से बाहर आ गए। गोपेश्वर और आसपास के इलाकों में लोगों ने झटके साफ महसूस किए। भूकंप का केंद्र बिंदु चमोली बताया गया है।

कुछ पलों की घबराहट

टीवी9 भारतवर्ष के मुताबिक करीब दो सेकेंड तक धरती हिलती रही। यह अवधि छोटी थी, लेकिन ताजा झटके ने लोगों में हलचल मचा दी। मकानों के अंदर रहे लोग तुरंत बाहर निकल आए और खुले मैदानों में इकट्ठा हो गए। गोपेश्वर समेत क्षेत्र के गांवों में रहने वाले लोगों ने भी झटके महसूस होने की जानकारी दी। काफी देर तक लोगों में अफरा-तफर का माहौल रहा। फिर स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो गई।

केंद्र और गहराई का आकलन

जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि भूकंप का आकलन राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र द्वारा किया गया है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.4 मापी गई। भूकंप का केंद्र चमोली रिकॉर्ड किया गया और यह झटका धरातल से लगभग पांच किलोमीटर की गहराई पर आया। कम गहराई पर आने वाले भूकंप के झटके सतह पर ज्यादा महसूस होते हैं, इसीलिए लोगों ने इसे स्पष्ट अनुभव किया।

नुकसान की कोई खबर नहीं

भूकंप से जान-माल के किसी नुकसान की खबर नहीं है। टीवी9 भारतवर्ष के मुताबिक जिला आपदा प्रबंधन की ओर से भी नुकसान की कोई सूचना दर्ज नहीं हुई। प्रशासन ने क्षेत्र के अवलोकन के बाद स्थिति सामान्य बताई। जागरण के मुताबिक प्रारंभिक आकलन में भी कहीं से मकानों को नुकसान पहुंचने या किसी के घायल होने की बात सामने नहीं आई।

संवेदनशील क्षेत्र है पहाड़

उत्तराखंड का बड़ा हिस्सा भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में आता है और हिमालय अभी भी निरंतर आकार ले रहा है। ऐसे में हल्के झटके यहां कभी-कभी दर्ज होते रहते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि हल्के भूकंप को हल्के में लेने की बजाय इमारतों की मजबूती और आपदा से बचाव की तैयारी पर ध्यान दिया जाए। चमोली जैसे पहाड़ी जिलों में यह तैयारी और भी जरूरी मानी जाती है।

प्रशासन सतर्क, लोगों को संदेश

आपदा प्रबंधन तंत्र ऐसे झटकों के बाद प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करता है ताकि किसी नुकसान की जानकारी तुरंत मिल सके। सोमवार शाम के झटके के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों ने गांवों तक स्थिति जानने की कोशिश की और सब जगह स्थिति सामान्य पाई गई। लोगों से अपील की गई है कि ऐसे समय में घबराहट में भागें नहीं, बल्कि शांत रहें और मजबूत जगह की ओर जाएं।

बचाव के लिए याद रखें बातें

आपदा विशेषज्ञ घर के अंदर झटके महसूस होने पर मेज जैसी मजबूत फर्नीचर के नीचे आश्रय लेने और सिर को ढाल कर रखने की सलाह देते हैं। बाहर रहने वालों को ऊंची इमारतों, बिजली के खंभों और खतरनाक ढलानों से दूर रहना चाहिए। बचाव की इन्हीं बातों को गांव-गांव में समझाने के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल भी आयोजित की जाती हैं। पहाड़ों में जागरूकता जितनी ज्यादा होगी, आपदा के समय जान का जोखिम उतना ही कम होगा। प्रशासन के अनुसार सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।