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टिहरी

टिहरी की शिवानी राणा बनीं सबसे कम उम्र की ग्राम प्रधान, निर्विरोध मिली जीत

टिहरी के भिलंग क्षेत्र की ग्राम सभा धारगांव में 21 साल 32 दिन की शिवानी राणा निर्विरोध ग्राम प्रधान चुनी गई हैं। पलायन रोकना उनकी पहली प्राथमिकता है।

टिहरी। उत्तराखंड को अब तक की सबसे कम उम्र की ग्राम प्रधान मिल गई है। जिले के भिलंग क्षेत्र की ग्राम सभा धारगांव में हुए पंचायत उपचुनाव में 21 साल 32 दिन की शिवानी राणा निर्विरोध ग्राम प्रधान चुनी गई हैं। इस जीत के साथ ही उन्होंने जिले की सबसे कम उम्र की प्रधान बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।

जुलाई में रद्द हुआ था नामांकन

शिवानी राणा ने बताया कि जुलाई में हुए पंचायत चुनाव में उन्होंने प्रधान पद के लिए नामांकन भरा था, लेकिन नामांकन पत्र की जांच के दौरान उनकी उम्र 21 साल से तीन महीने कम पाई गई थी। जन्मतिथि 16 अक्टूबर 2004 होने के कारण उस समय उनका नामांकन रद्द हो गया था। 16 अक्टूबर को 21 साल पूरे होने के बाद उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें उन्होंने दोबारा नामांकन भरा।

उपचुनाव में अकेली उतरीं, निर्विरोध चुनी गईं

उपचुनाव में धारगांव से अकेले शिवानी राणा ने ही नामांकन किया था। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक किसी अन्य प्रत्याशी ने पर्चा दाखिल नहीं किया, जिसके बाद उन्हें निर्विरोध प्रधान घोषित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि 16 अक्टूबर की शाम पांच बजे ही उन्हें प्रधान बनने की जानकारी मिल गई थी।

ग्रामीणों ने जताया भरोसा

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत चुनाव के समय ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि शिवानी ही उनकी अगली प्रधान होंगी। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में प्रधान पद सामान्य महिला वर्ग में आ जाए, तब भी वे शिवानी का ही समर्थन करेंगे। सहमति के चलते उपचुनाव में कोई दूसरा उम्मीदवार सामने नहीं आया।

पलायन रोकना पहली प्राथमिकता

प्रधान बनने के बाद शिवानी राणा ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता गांव से पलायन रोकना है। गांव में कुल 218 वोट हैं, जिनमें से आधे से ज्यादा लोग पलायन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल गांव से बहुत दूर है और गांव तक जाने वाला रास्ता भी खराब है, जिससे बच्चों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। इन समस्याओं के समाधान के लिए वे अधिकारियों से बात करेंगी।

शिक्षा के क्षेत्र में बनाना है करियर

शिवानी राणा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरस्वती शिशु मंदिर धोपड़धार से की और राजकीय इंटर कॉलेज से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2024 में उन्होंने विज्ञान विषय में स्नातक किया और इस समय हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीएड कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई जारी रखते हुए वे पंचायत की जिम्मेदारियां भी संभालेंगी और भविष्य में शिक्षा के क्षेत्र में ही करियर बनाना चाहती हैं।

परिवार से मिला पूरा सहयोग

शिवानी के परिवार में सात लोग हैं। उनके पिता विशाल सिंह राणा यूटिलिटी वाहन चलाते हैं, जबकि माता सुमित्रा राणा प्राथमिक स्कूल में शिक्षा मित्र के रूप में कार्यरत हैं। शिवानी ने बताया कि जब उन्होंने घर में चुनाव लड़ने की इच्छा जताई तो परिजनों ने पूरा हौसला बढ़ाया। ग्रामीणों ने भी उन्हें हर स्तर पर समर्थन दिया।

निर्वाचित होने के बाद किए दर्शन

निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद शिवानी राणा ने धारी देवी मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने कहा कि वे गांव की जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएंगी और युवाओं को भी पंचायत की कार्यप्रणाली से जोड़ने का प्रयास करेंगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि युवाओं का पंचायत में आना सकारात्मक बदलाव का संकेत है।