चमोली। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा को लेकर बड़ी परंपरागत घोषणा हो चुकी है। बसंत पंचमी के पावन मौके पर नरेंद्र नगर स्थित राजमहल में विधि-विधान के साथ बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि का आधिकारिक ऐलान किया गया। दैनिक भास्कर के अनुसार परंपरा के अनुसार राजपुरोहित टिहरी के राजा मनुजेंद्र शाह की जन्मपत्री और लग्न पत्रिका देखकर शुभ मुहूर्त निकालते हैं। इस बार बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।
पिछले साल से 11 दिन पहले खुलेंगे कपाट
इस बार बदरीनाथ के कपाट पिछले वर्ष के मुकाबले 11 दिन पहले खुलने की घोषणा हुई है। बताया जाता है कि धाम के कपाट पिछले साल 4 मई को खोले गए थे। परंपरा के अनुसार मुहूर्त के दिन तय होने के साथ ही यात्रा की तैयारियों को गति मिल गई है। बदरी-केदार मंदिर समिति, तीर्थ पुरोहितों और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। यात्रा मार्गों की मरम्मत और पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं व सुरक्षा व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है।
गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट 19 अप्रैल को
चारधाम यात्रा की शुरुआत अक्षय तृतीया के पर्व से मानी जाती है। इसी अवसर पर 19 अप्रैल को उत्तरकाशी के गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट विधि-विधान से भक्तों के लिए खोले जाएंगे। इन दोनों धामों के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो जाएगा। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि परंपरा के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में पंचांग गणना के बाद घोषित की जाएगी।
शीतकालीन पूजा चल रही नरसिंह मंदिर में
बदरीनाथ धाम के कपाट पिछले साल 25 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद किए गए थे। इस वक्त भगवान बदरी विशाल की शीतकालीन पूजा जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में चल रही है। उत्तरकाशी में गंगोत्री धाम के कपाट पिछले साल 22 अक्टूबर को बंद हुए थे, जिसके अगले दिन 23 अक्टूबर को यमुनोत्री के कपाट बंद किए गए थे।
गाडू घड़ा यात्रा और उत्सव डोलियों की परंपरा
कपाट खुलने से पहले गाडू घड़ा यात्रा राजमहल पहुंचती है। कुंवारी और सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर बदरीनाथ धाम के लिए तिल का तेल निकालती हैं। मुंह पर पीला कपड़ा बांधकर किया जाने वाला यह धार्मिक कार्य तेल की पवित्रता बनाए रखने के लिए है। इसी तेल से धाम में भगवान बदरी विशाल की पूजा-अर्चना होती है।
डोलियों का प्रस्थान कब और कहां से
चारधाम परंपरा के अनुसार कपाट खुलने से पहले मां गंगा और मां यमुना की उत्सव डोलियां अपने शीतकालीन प्रवास स्थलों से धामों की ओर रवाना होंगी। मां गंगा की उत्सव डोली 18 अप्रैल को मुखवा गांव से रवाना होगी और भैरव मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद 19 अप्रैल को गंगोत्री धाम पहुंचेगी। मां यमुना की डोली 19 अप्रैल की सुबह खरशाली से निकलकर उसी दिन यमुनोत्री धाम पहुंचेगी।
श्रद्धालुओं में दिख रहा खासा उत्साह
कपाट खुलने की तिथियों की घोषणा के साथ ही श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। एबीपी न्यूज़ के मुताबिक बड़ी संख्या में भक्त अभी से यात्रा की योजना बनाने लगे हैं और माना जा रहा है कि इस बार भी चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए उत्तराखंड पहुंचेंगे। यात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन विशेष ध्यान दे रहा है।
बदरीनाथ मास्टर प्लान का काम तेज
बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत आधुनिक सुविधाओं का काम भी तेज चल रहा है। करीब 424 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को अगली यात्रा से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्थाएं मिल सकें। 85 एकड़ क्षेत्र में तीन चरणों में चल रहे इस प्लान में शेषनेत्र और बद्रीश झील के सौंदर्याकरण का काम अंतिम चरण में है।