चमोली। जिले के नंदानगर क्षेत्र में बादल फटने से भारी तबाही हुई है। जिला प्रशासन के मुताबिक 18 सितंबर की सुबह अचानक आए पानी और मलबे की धारा में घर बह गए और नाले-गदेरों पर भयानक बहाव आ गया। घटना के बाद आपदा प्रबंधन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं और राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया।
सुबह-सुबह का हादसा
बताया जाता है कि बादल फटने की यह घटना सुबह के समय हुई, जब ज्यादातर लोग घरों में ही थे। अचानक आए तूफानी पानी की आवाज के साथ मलबा बहते हुए गांवों की ओर दौड़ पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्र में दो अलग-अलग जगहों पर आपदा की स्थिति बनी और उफान पर आई मोक्षा नदी ने आसपास के इलाकों में तबाही मचाई। छह घर पूरी तरह तबाह हो गए, जबकि गौशालाएं, खेत और सड़कें भी पानी की जद में आ गईं।
लापता लोगों की तलाश जारी
अधिकारियों के मुताबिक आपदा में दस से अधिक लोग लापता बताए गए। बचाव टीमों ने मलबे में दबे कुछ लोगों को जिंदा निकाला और दो लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकालने की खबर भी रही। 19 सितंबर तक मलबे से पांच शव बरामद हो चुके थे और लापता लोगों की तलाश लगातार जारी रही। दर्दनाक घटना में एक परिवार का पिता लंबे संघर्ष के बाद जिंदा बचा, लेकिन उसकी पत्नी और बच्चों की जान नहीं बच सकी — यह खबर पूरे क्षेत्र में सन्न पहुंचा देने वाली रही।
मुख्यमंत्री का दौरा और आश्वासन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना के दिन ही देहरादून से समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को राहत-बचाव तेज करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद वे प्रभावित क्षेत्र का हवाई जायजा लेने और पीड़ितों से मिलने नंदानगर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावितों से मुलाकात कर हर संभव मदद का आश्वासन दिया और मुआवजा प्रक्रिया तेज करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त परिवारों को राहत सामग्री के साथ पुनर्वास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
बेघर परिवारों की दिक्कतें
आपदा के बाद कई परिवार ऐसे इलाकों में रह गए, जहां दोबारा किसी हादसे का खतरा था। प्रशासन ने ऐसे लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट करना शुरू किया और राहत शिविरों में ठहराव, खान-पान और चिकित्सा की व्यवस्था की। गांवों के रास्ते मलबे से जाम होने से रोजमर्रा का जीवन ठप पड़ गया और बिजली-पानी की लाइनों की मरम्मत का काम चल रहा है।
पहाड़ों में बढ़ रही आपदाओं का पैटर्न
पहाड़ी क्षेत्रों में बादल फटने और अचानक भारी बारिश की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ इसके लिए बदलती जलवायु, ढलानों पर बढ़ता दबाव और जल निकासी की समस्या को जिम्मेदार मानते हैं। मानसून के आखिरी दिनों में भी जमीन पूरी तरह संतृप्त रहती है, ऐसे में थोड़ी तेज बारिश भी भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं को जन्म दे देती है।
नुकसान के आकलन का काम भी चल रहा है, जिसके आधार पर प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। पुनर्वास के लिए सुरक्षित जगह चिह्नित की जा रही है और राहत सामग्री पहुंचाने का काम जारी है। अधिकारी मौसम की चेतावनियों का हवाला देकर क्षेत्र के लोगों से सतर्क रहने और खतरनाक ढलानों के पास न जाने की अपील की है।