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मनसा देवी में भूस्खलन: ऋषिकेश-देहरादून मार्ग बंद, यात्रियों को लगाया चक्कर

हरिद्वार में मनसा देवी पहाड़ी से मलबा गिरने से ऋषिकेश-देहरादून मार्ग बंद। रेल यातायात भी ठप, प्रशासन ने यात्रियों को वैकल्पिक रास्ते से भेजा।

हरिद्वार। मनसा देवी की पहाड़ियों से मलबा और बोल्डर गिरने से ऋषिकेश-देहरादून मार्ग बंद हो गया। प्रशासन के मुताबिक लगातार बारिश के चलते ढलान कमजोर हो गई थी, जिससे भूस्खलन हुआ। घटना के बाद मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और दोनों तरफ की आवाजाही ठप पड़ गई। इसी पहाड़ी से गिरे पत्थर रेलवे ट्रैक पर भी आ गिरे, जिससे देहरादून-हरिद्वार रेल मार्ग पर यातायात भी ठप हो गया और कई गाड़ियों का संचालन प्रभावित हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रेल ट्रैक के पास डाट काली मंदिर की पहाड़ी से गिरे बोल्डर रेल यातायात ठप होने की बड़ी वजह बने।

मलबा गिरने के बाद की स्थिति

पहाड़ी से गिरे बड़े पत्थर और मलबे से सड़क पूरी तरह जाम हो गई। सुबह से रास्ता पकड़ चुके वाहन दोनों ओर खड़े रह गए और यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। मंदिर दर्शन के लिए आए श्रद्धालु और रोज इसी रास्ते से दफ्तर जाने वाले लोगों और व्यापारियों को सबसे ज्यादा दिक्कत हुई। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और आवाजाही को वैकल्पिक मार्ग से मोड़ा गया, जिससे यात्रियों का सफर लंबा हो गया। कई लोगों को अपना रास्ता बदलकर चक्कर काटकर आगे बढ़ना पड़ा।

तीर्थ और रोजमर्रा की आवाजाही की कड़ी

हरिद्वार से ऋषिकेश और आगे देहरादून जाने वाला यह हिस्सा तीर्थयात्रा, पर्यटन और रोजमर्रा की आवाजाही की मुख्य कड़ी है। मनसा देवी मंदिर के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सालभर बनी रहती है, जबकि हरिद्वार रेलवे स्टेशन से देहरादून और ऋषिकेश जाने वाला रास्ता पहाड़ के द्वार का काम करता है। मानसून के दौरान इस क्षेत्र की पहाड़ियों पर बार-बार मलबा गिरने की घटनाएं होती रहती हैं, इसलिए बारिश के दिनों में यह हिस्सा सबसे संवेदनशील माना जाता है।

राहत और बहाली का काम

प्रशासन ने मलबा हटाने के लिए मशीनरी लगाई और जेसीबी की मदद से सड़क साफ करने का काम शुरू किया। एसडीआरएफ की टीम भी मौके पर तैनात रखी गई, ताकि कोई फंसा व्यक्ति हो तो तुरंत मदद पहुंचे। अधिकारियों का कहना है कि मौसम साफ होने पर मार्ग फिर से चालू किया जाएगा और रेलवे ट्रैक से भी मलबा हटाकर गाड़ियों का परिचालन बहाल किया जाएगा। ढलानों पर सुरक्षा दीवार और जाल लगाने का काम मानसून के बाद किया जाना बताया गया है। यात्रियों से अपील की गई है कि बारिश के दौरान निकलने से पहले मार्ग की ताजा जानकारी जरूर लें।

आगे की तैयारी

इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि मानसून में पहाड़ी किनारे के मार्गों पर यात्रा कितनी नाजुक हो जाती है। हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून के बीच का यह हिस्सा सड़क और रेल दोनों के लिहाज से व्यस्ततम रूट है, इसलिए यहां एक भी भूस्खलन हजारों यात्रियों और स्थानीय आवाजाही को सीधे प्रभावित करता है। अधिकारियों की योजना अब संवेदनशील ढलानों की पहचान कर उन पर स्थायी सुरक्षा इंतजाम करने की है, ताकि अगले सीजन में यात्रियों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।