उत्तराखंड के सीमांत जिले उत्तरकाशी में गुरुवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। धरती हिलने का एहसास होते ही लोग सकते में आ गए और कुछ पलों के लिए इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
रात 8:02 बजे महसूस हुए झटके
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली आधिकारिक सूचना के अनुसार भूकंप के झटके गुरुवार रात ठीक 8:02 बजे महसूस किए गए। झटके मुख्य रूप से भटवाड़ी तहसील के अंतर्गत ही महसूस किए गए। एहतियात के तौर पर कई लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों से बाहर निकल आए।
पिलंग के जंगलों में सात किलोमीटर गहराई पर था केंद्र
उत्तरकाशी जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के मुताबिक भूकंप का केंद्र भटवाड़ी तहसील के अंतर्गत पिलंग गांव के जंगलों में भूमि से लगभग सात किलोमीटर की गहराई पर था। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 3.5 दर्ज की गई। कम तीव्रता होने के कारण जिले के अन्य क्षेत्रों में इसका विशेष प्रभाव नहीं देखा गया। झटके कुछ ही सेकंड तक महसूस हुए और इसके बाद स्थिति सामान्य हो गई। जिला आपदा नियंत्रण कक्ष ने आपदा की स्थिति में हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और लोगों से किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है।
प्रशासन और आपदा विभाग अलर्ट मोड पर
भूकंप की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग सक्रिय हो गया। विभिन्न तहसीलों, पुलिस थानों और संबंधित विभागों से तत्काल स्थिति की जानकारी जुटाई गई। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार जिले में कहीं से भी किसी प्रकार की जनहानि, भवन क्षति अथवा अन्य नुकसान की सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
संवेदनशील जोन में आता है उत्तरकाशी
भौगोलिक दृष्टि से उत्तरकाशी जनपद भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यह क्षेत्र जोन 4 और जोन 5 में आता है, जहां बड़े भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है। यही कारण है कि जब भी यहां धरती हिलती है, स्थानीय प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ जाता है।
1991 के विनाशकारी भूकंप की यादें ताजा
भूकंप के इन हल्के झटकों ने एक बार फिर उत्तरकाशी के लोगों की धड़कनें बढ़ा दीं। इन झटकों से वर्ष 1991 में आए विनाशकारी भूकंप की यादें ताजा हो गईं, जिसने इसी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी। उस भूकंप में उत्तरकाशी और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। स्थानीय लोगों का कहना है कि भूकंप के हल्के झटकों को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
सतर्कता बरतने की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे भूकंप के झटके महसूस होने पर घबराएं नहीं और सुरक्षित स्थानों पर जाएं। पहाड़ी इलाकों में भूकंप के बाद भूस्खलन का खतरा भी बना रहता है, इसलिए ढलानों और कच्चे मकानों के पास विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की तत्परता को सराहा। विशेषज्ञों के मुताबिक भूकंप के दौरान मजबूत फर्नीचर के नीचे शरण लेनी चाहिए या खुले स्थान पर जाना चाहिए, तथा ढलानों, लटकती चट्टानों और कच्ची दीवारों से दूर रहना चाहिए। झटके थमने के बाद ही सुरक्षित निकासी करनी चाहिए।