उत्तराखंड में शुक्रवार को एक तरफ हाईकोर्ट ने भर्ती से जुड़ा अहम फैसला सुनाया, तो दूसरी तरफ बंद सड़कों की मार झेल रहे एक परिवार को बड़ी मशक्कत के बाद अस्पताल पहुंचना पड़ा।
हाईकोर्ट ने UKPSC का फैसला पलटा
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने UKPSC के असिस्टेंट प्रोफेसर (रसायन) भर्ती के आवेदन रद्द करने के फैसले को पलट दिया है। हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने अभ्यर्थी नीलम आर्य और सुमन लता पाल के आवेदन निरस्त करने के आदेश को निरस्त कर दिया।
एक ही अभ्यर्थी को तीन बार अलग-अलग माना गया पात्र
इस मामले में आयोग की ओर से शासन से पूछा गया तो दो बार नीलम को अपात्र, जबकि तीसरी बार पात्र करार दिया गया। कोर्ट ने दोनों याचिकाओं को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को एक लाख रुपये का व्यय चार सप्ताह के भीतर देने का भी आदेश दिया है।
पीएचडी के विषय पर विवाद
यह विवाद तब हुआ जब डॉ. आर्य की कृषि रसायन में पीएचडी को पद के लिए अनुपयुक्त माना गया, जबकि उनके पास एमएससी की डिग्री थी। राज्य लोक सेवा आयोग का तर्क था कि पीएचडी स्पष्ट रूप से रसायन शास्त्र में होनी चाहिए, जबकि न तो नौकरी के विज्ञापन में और न ही मानक यूजीसी नियमों में ऐसी कोई शर्त थी।
डॉक्टरेट विषय पर प्रतिबंध नहीं
कोर्ट ने पाया कि यूजीसी नियमों के अनुसार पीएचडी को 2009 या 2016 के दिशानिर्देशों का पालन करना होता है, लेकिन डॉक्टरेट की डिग्री के विषय पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाता। इस आधार पर कोर्ट ने आयोग के फैसले को त्रुटिपूर्ण माना। कोर्ट के इस फैसले के बाद आयोग को दोनों अभ्यर्थियों के आवेदन फिर से विचार करने होंगे और अगली प्रक्रिया अदालत के आदेश के अनुरूप पूरी करनी होगी।
उत्तरकाशी में बीमार महिला को पांच किमी ढोया
दूसरी ओर उत्तरकाशी के पुरोला में भूस्खलन से डेढ़ सप्ताह से बंद सांकरी-फिताड़ी-लिवाड़ी सड़क के कारण गुरुवार को रेक्चा गांव की बीमार 26 वर्षीय महिला सपना को स्वजन ने डंडी-कंडी से खेड़ा घाटी पुल के पास पहुंचाया।
एंबुलेंस से पहुंचाया अस्पताल
गुरुवार को रेक्चा गांव निवासी आनंद सिंह की पत्नी सपना की अचानक तबीयत बिगड़ी और वह बेहोश हो गई। स्वजन उसे रेक्चा गांव से खेड़ा पुल तक पांच किलोमीटर डंडी-कंडी से ले गए, जहां से हंस फाउंडेशन की एंबुलेंस से दो घंटे बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी पहुंचाया गया।
ग्रामीणों ने बताई परेशानी
ग्रामीण संतोष सिंह ने बताया कि सड़क बंद होने के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी के प्रभारी चिकित्सक ने बताया कि महिला का उपचार शुरू कर दिया गया है। इस घटना ने पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क की अहमियत एक बार फिर उजागर कर दी है। यह मजबूरी भी दिखाती है कि बरसात के दिनों में सड़कें बंद होते ही गांव अस्पताल से कट जाते हैं। प्रशासन ने सड़क बहाली के लिए अतिरिक्त मशीनरी लगाने की बात कही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि भूस्खलन प्रभावित मार्गों की मरम्मत स्थायी तौर पर की जाए, ताकि बरसात के दिनों में गांवों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।