उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। ग्रीन सेस टैक्स का दायरा बढ़ाकर अब उसे राज्य की सभी प्रवेश सीमाओं पर लागू किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक इस कदम का मकसद पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक संसाधन जुटाना है।
ग्रीन सेस क्या है
ग्रीन सेस एक पर्यावरणीय शुल्क है, जो राज्य में प्रवेश करने वाले वाहनों से वसूला जाता है। इससे मिली राशि का उपयोग पर्यावरण संरक्षण और हरित परियोजनाओं पर किया जाता है। इस शुल्क को यात्रियों के वाहनों पर भी लागू किया जाता है।
दायरा बढ़ाने का फैसला
अब तक यह शुल्क चुनिंदा प्रवेश द्वारों पर ही वसूला जाता था। नए फैसले के तहत इसे राज्य की सभी प्रमुख सीमाओं पर लागू किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे राज्य में आने वाले सभी वाहनों से समान रूप से शुल्क वसूला जा सकेगा।
वसूली की व्यवस्था
शुल्क की वसूली के लिए सीमाओं पर आवश्यक व्यवस्था की जा रही है। संबंधित विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे वसूली प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाएं। इसके लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा रहा है।
पर्यटन पर पड़ेगा असर
उत्तराखंड में साल भर बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं, जिनके वाहन राज्य की सीमाओं से प्रवेश करते हैं। दायरा बढ़ने से शुल्क वसूली बढ़ेगी, जिसका असर पर्यटन कारोबार पर भी पड़ सकता है। कुछ कारोबारियों ने आशंका जताई है कि इससे यात्रियों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।
सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि यह शुल्क पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है। बढ़ते पर्यटन और वाहनों के दबाव से राज्य के पर्यावरण पर असर पड़ता है, इसलिए संसाधन जुटाना आवश्यक है। अधिकारियों के मुताबिक वसूली गई राशि हरित परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी।
राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद
दायरा बढ़ने से राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। अधिकारियों का मानना है कि अतिरिक्त आय से पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को गति मिलेगी। इस राशि का उपयोग वन क्षेत्र के संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में भी किया जा सकेगा।
वाहन चालकों के लिए जानकारी
वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे सीमा पर शुल्क की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ें। शुल्क की दर और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर संबंधित विभाग की ओर से जानकारी जारी की जाएगी। किसी भी तरह की असुविधा से बचने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करें।
विशेषज्ञों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञों ने शुल्क का दायरा बढ़ाए जाने को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया है। उनका कहना है कि अगर इस राशि का सही उपयोग हो तो पर्यावरण संरक्षण को ठोस फायदा मिल सकता है। हालांकि उन्होंने वसूली में पारदर्शिता पर भी जोर दिया है।
कारोबारियों की प्रतिक्रिया
पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों ने सरकार से शुल्क की दरें तर्कसंगत रखने की मांग की है। उनका कहना है कि ज्यादा शुल्क से पर्यटक दूसरे स्थानों की ओर रुख कर सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि वसूली गई राशि का इस्तेमाल पर्यटन स्थलों की सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाए।