पौड़ी। जिले के पोखड़ा ब्लॉक में गुलदार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। गुरुवार सुबह घास काटने गई रानी देवी (65) को आदमखोर गुलदार ने अपना निवाला बना लिया। बागड़ीगाड़ गांव की रहने वाली रानी देवी सुबह अपनी बहू सपना और पोते के साथ खेत की ओर निकली थीं। घर भेजते समय उन्होंने बहू से कहा था कि वह आधे घंटे में घास काटकर लौट आएंगी, लेकिन वह वापस नहीं लौटीं।
पोते को झाड़ियों में दिखी दादी की साड़ी
जब काफी देर तक रानी देवी घर नहीं लौटीं, तो परिवार और गांव के लोग उन्हें खोजने निकले। खेत के पास झाड़ियों में उनका शव मिला। बताया जाता है कि सबसे पहले पोते ने झाड़ियों में दादी की साड़ी देखी। वन विभाग और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
इस साल गुलदार ने ली तीन जानें
पोखड़ा ब्लॉक में इस साल गुलदार तीन लोगों को निवाला बना चुका है, जबकि दर्जनों लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर चुका है। हमलों की घटनाएं इतनी तेजी से बढ़ी हैं कि ग्रामीण हर दिन डर के साये में जीने को मजबूर हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों और खेतों में काम करने वाली महिलाओं में सबसे ज्यादा दहशत है।
शव के अंतिम संस्कार से किया इनकार
घटना के बाद ग्रामीणों में गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया और वन विभाग के रेंज ऑफिस के बाहर देर रात तक प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार चेतावनी के बावजूद विभाग ने गुलदार को पकड़ने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, जिसका नतीजा अब एक और मौत के रूप में सामने आया है।
मंत्री के हस्तक्षेप के बाद शूट एट साइट आदेश
बढ़ते दबाव के बीच कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने मामले में हस्तक्षेप किया। इसके बाद प्रशासन ने करीब एक साल बाद आदमखोर गुलदार को शूट-एट-साइट के आदेश जारी कर दिए। वन विभाग की टीम इलाके में सक्रिय है और गुलदार की लोकेशन ट्रेस करने के साथ ही गश्त भी तेज कर दी गई है।
पिंजरा लगाने के साथ तेज हुई गश्त
वन विभाग ने प्रभावित गांवों के आसपास पिंजरे लगाने और गश्त बढ़ाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे गुलदार के मूवमेंट की जानकारी तुरंत विभाग तक पहुंचाएं। अधिकारियों का कहना है कि शूट एट साइट का आदेश पूरी सतर्कता के साथ लागू किया जाएगा, ताकि किसी अन्य की जान न जाए।
परिवार में छाया मातम
रानी देवी के पति रमेश चंद्र और दोनों बेटे मुकेश तथा राकेश दुकान चलाते हैं। परिवार के लिए यह सदमा बर्दाश्त से बाहर है। गांव के लोगों ने परिवार के साथ खड़े रहने और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने की मांग की है।
बढ़ते हमलों पर उठे सवाल
पहाड़ी जिलों में गुलदार और अन्य वन्यजीवों के हमलों का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। जंगल से सटे गांवों में घास काटने और पशु चराने गए लोगों पर हमले की घटनाएं आम होती जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीव प्रबंधन और गश्त की व्यवस्था मजबूत किए बिना इन हमलों पर लगाम नहीं लगेगी।