अल्मोड़ा। सांस्कृतिक नगरी के पौराणिक बाजार को नया स्वरूप मिलने जा रहा है। ईटीवी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक बाजार की सुंदरता बिगाड़ रही बिजली की बेतरतीब तारों और पानी की लाइनों को अंडरग्राउंड किया जाएगा। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने बाजार का भ्रमण कर यह निर्देश दिए और सौंदर्यीकरण के काम को तेजी से पूरा करने को कहा। बाजार को पहले की तरह पटाल बाजार जैसी आदर्श सांस्कृतिक पहचान के रूप में विकसित करने की बात कही गई है।
बाजार के साथ मल्ला महल भी संवरेगा
रिपोर्ट के मुताबिक पर्यटन सचिव ने मल्ला महल का निरीक्षण कर अधिकारियों को जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दशहरे तक मल्ला महल पर्यटकों के लिए खोला जाए, वहीं वहां कैफेटेरिया और लाइट एंड साउंड शो तत्काल शुरू हो और सीसीटीवी लगाने का काम जल्द पूरा किया जाए। मल्ला महल में नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के भी निर्देश दिए गए।
- बिजली की बेतरतीब तारें और पानी की लाइनें होंगी अंडरग्राउंड
- बाजार पहले की तरह पटाल बाजार जैसा विकसित होगा
- दशहरे तक मल्ला महल पर्यटकों के लिए खुलेगा
- जिले में पैराग्लाइडिंग के लिए स्थल चिह्नित करने के निर्देश
सांस्कृतिक धरोहर को मॉडल बनाने का लक्ष्य
पर्यटन सचिव ने कहा कि लक्ष्य अल्मोड़ा की सांस्कृतिक धरोहर को एक मॉडल के रूप में संवारना है। उन्होंने जिला पर्यटन विकास अधिकारी को पर्यटन विकास के प्रस्ताव जल्द तैयार करने को कहा और साफ शब्दों में कहा कि इसके लिए बजट की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। साहसिक पर्यटन की संभावनाओं पर जोर देते हुए जिले में पैराग्लाइडिंग के उपयुक्त स्थल चिह्नित कर उनके विकास के भी निर्देश दिए गए।
मानसखंड मंदिर माला मिशन की समीक्षा
भ्रमण से पहले सर्किट हाउस में आयोजित विभागीय बैठक में पर्यटन सचिव ने मानसखंड मंदिर माला मिशन की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि मिशन के तहत कुमाऊं के मंदिरों का सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं का विकास तेजी से किया जा रहा है। उनके मुताबिक पर्यटन सुविधाओं का विस्तार कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे। इसके बाद उन्होंने नंदा देवी मंदिर का भी स्थलीय निरीक्षण किया और परिसर के सौंदर्यीकरण को लेकर दिशा-निर्देश दिए।
पहाड़ी शहरों में खिंची बेतरतीब लाइनें
पुराने पहाड़ी शहरों में ऊपर से गुजरती तारों की कतार आम नजारा है। इससे सिर्फ शहर की तस्वीर बिगड़ती है, बल्कि बारिश के दिनों में शॉर्ट सर्किट और आग जैसी घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में लाइनों का अंडरग्राउंड होना सुरक्षा की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
खुला-खुला दिखेगा पौराणिक बाजार
लाइनें जमीन के नीचे चली जाने से बाजार और सड़कों का दृश्य खुला-खुला दिखेगा और खंभों-तारों की भीड़ कम होगी। यहां की लोक कला, काष्ठकला और कारीगरी के लिए जानी जाने वाली सांस्कृतिक नगरी पर्यटकों को अब ज्यादा सजी-संवरी नजर आएगी। पुराने बाजारों की चहल-पहल लौटने से दुकानदारों और होटल व्यवसायियों को भी उम्मीद बंधी है। अधिकारियों के मुताबिक काम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा, जिसमें बिजली और जल संस्थाओं के साथ तालमेल रखा जाएगा, ताकि रोजमर्रा की जिंदगी पर असर कम से कम पड़े।