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चमोली

चमोली: छात्रों से कार धुलवाने वाला शिक्षक निलंबित, जांच शुरू

चमोली जिले में छात्रों से अपनी कार धुलवाने के आरोप में एक शिक्षक को निलंबित किया गया है। शिक्षा विभाग ने पूरे प्रकरण की गहराई से जांच शुरू कर दी है।

चमोली। जिले में छात्रों से अपनी कार धुलवाने के आरोप में एक शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है। शिक्षा विभाग के मुताबिक मामला सामने आते ही तुरंत कार्रवाई की गई और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है। आरोप है कि शिक्षक ने स्कूली छात्रों से अपनी निजी गाड़ी धुलवाने का काम कराया। घटना की जानकारी और शिकायत के बाद विभाग ने मामला संज्ञान में लिया और निलंबन की कार्रवाई की।

सरकारी स्कूलों में छात्रों से घरेलू या निजी काम कराना विभागीय नियमों के खिलाफ है। शिक्षक की जिम्मेदारी कक्षा में पढ़ाना और छात्रों का मार्गदर्शन करना है, न कि उनसे अपने निजी काम करवाना। ऐसी घटनाएं कक्षा के माहौल को प्रभावित करती हैं और छात्रों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाती हैं। इसीलिए विभाग इस तरह के मामलों में सख्ती बरतता है और शिकायत मिलते ही कार्रवाई का रास्ता अपनाता है।

विभाग की कार्रवाई के कदम

जानकारी के मुताबिक निलंबन के साथ ही जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्कूल में अन्य शिक्षकों और कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम का सही आकलन हो सके। जांच अधिकारी की रिपोर्ट आने के बाद विभागीय नियमों के तहत आगे की कार्रवाई तय होगी। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई से कोई नहीं बच पाएगा।

विभागीय नियम और सख्ती

सरकारी स्कूलों में छात्रों से निजी या घरेलू काम कराना प्रतिबंधित है। इसके पीछे की सोच सीधी है — स्कूल परिसर में शिक्षक और छात्र का रिश्ता शिक्षा के इर्द-गिर्द घूमता है। जब छात्रों से निजी काम करवाने की घटनाएं सामने आती हैं, तो कक्षा में शिक्षक के प्रति सम्मान और बच्चों का आत्मविश्वास दोनों प्रभावित होते हैं। पहाड़ी इलाकों के सरकारी स्कूलों में ज्यादातर बच्चे आम, सीमित साधनों वाले परिवारों से आते हैं, इसलिए ऐसी घटनाओं पर तुरंत संज्ञान लेना और भी जरूरी हो जाता है। ऐसा माहौल बना रहे तो बच्चे बिना डर के स्कूल आते हैं, शिक्षक-छात्र का रिश्ता भरोसे पर टिकता है और पढ़ाई पर ध्यान भी बना रहता है। विभाग का रुख इस मामले में साफ है — पहले शिकायत, फिर जांच और उसके बाद नियमानुसार कार्रवाई।

अभिभावकों की अपेक्षा

स्थानीय अभिभावकों ने उम्मीद जताई है कि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होगी और जो लोग दोषी पाए जाएंगे, उन्हें नियमों के तहत सजा मिलेगी। उनका कहना है कि बच्चों का स्कूल जाना सिर्फ पढ़ाई के लिए होता है और उनके साथ कोई भी ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए जिससे उनका मन पढ़ाई से हटे। गांव के बुजुर्ग भी यही उम्मीद रखते हैं कि शिक्षा के मंदिर की गरिमा हर हाल में कायम रहे। विभाग के मुताबिक जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी और मामले में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हीं के हिसाब से निर्णय लिया जाएगा। अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट पर हैं, जिससे साफ होगा कि मामले का असली चेहरा क्या है और किस स्तर तक जिम्मेदारी तय होती है।