शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 देहरादून, उत्तराखंड
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देहरादून

देहरादून की हवा हुई जहरीली, एक्यूआई 300 के पास पहुंचा, दीपावली से भी ज्यादा प्रदूषण

राजधानी देहरादून की हवा लगातार बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है और एक्यूआई 300 के आसपास पहुंच गया है। सड़कों की धूल प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बताई जा रही है।

देहरादून। राजधानी देहरादून की हवा इन दिनों जहरीली होती जा रही है और वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक देहरादून का एक्यूआई 300 के आसपास दर्ज किया गया है। हैरानी की बात यह है कि दीपावली के दौरान जब पटाखे जलाए गए थे, तब भी हवा की गुणवत्ता इतनी खराब नहीं हुई थी, जितनी इन दिनों दर्ज की जा रही है।

राजधानी की हवा बेहद खराब श्रेणी में

बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार सोमवार को एक्यूआई 299 दर्ज किया गया, जबकि सोमवार रात कुछ समय के लिए यह स्तर 300 के पार भी गया। मंगलवार को जारी बुलेटिन में एक्यूआई 294 रहा। यह स्तर बेहद खराब श्रेणी में आता है और लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल बना रहा है। दीपावली के समय एक्यूआई 254 तक पहुंचा था, ऐसे में दिसंबर का यह स्तर उससे भी ज्यादा चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

दिन ढलते ही छा जाती है धुंध

शहर में दिन ढलते ही धुंध की परत छा जाती है, जिससे दूर की इमारतें और पहाड़ियां तक साफ नजर नहीं आतीं। प्रदूषण के कण हवा में लंबे समय तक लटके रहते हैं। रात में बादल छाने और हवा की गति धीमी होने के कारण प्रदूषण के कण ऊपर नहीं उठ पाते, जिससे धरती के नजदीक ही जमा हो जाते हैं और गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है।

धूल है सबसे बड़ा कारण

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार हवा में प्रदूषण बढ़ने की सबसे बड़ी वजह सड़कों पर वाहनों की आवाजाही से उड़ने वाली धूल है, जो कुल प्रदूषण का करीब 56 प्रतिशत हिस्सा है। वाहनों से निकलने वाला धुआं लगभग 17 प्रतिशत प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है, जबकि उद्योगों से करीब 10 प्रतिशत और घरों में जलने वाले चूल्हे, कोयला तथा कूड़े से करीब 14 प्रतिशत प्रदूषण फैल रहा है।

सांस के मरीजों के लिए बढ़ा खतरा

चिकित्सकों के अनुसार एक्यूआई 200 से पार होते ही सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इन लोगों को विशेष एहतियात बरतनी चाहिए और सुबह के समय बाहर निकलने से बचना चाहिए। मास्क का इस्तेमाल और घर की खिड़कियां बंद रखने जैसी सावधानियां अपनाई जा सकती हैं।

बारिश से मिल सकती है राहत

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बारिश होती है या तेज हवाएं चलती हैं, तो प्रदूषण के कण बह जाएंगे और हवा साफ हो सकती है। हालांकि फिलहाल बारिश की कोई संभावना नहीं जताई गई है, ऐसे में सुधार आने की उम्मीद कम है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर मौसम में बदलाव नहीं हुआ और वाहनों का दबाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

नगर निगम पर बढ़ा दबाव

प्रदूषण बढ़ने के साथ ही शहर में सड़कों पर पानी का छिड़काव करने और धूल दबाने की मांग तेज हो गई है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए सख्त नियमों की जरूरत है। साथ ही पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित रास्ते विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

तीर्थनगरी की हवा गंभीर श्रेणी में

राजधानी के साथ प्रदेश के अन्य शहरों की हवा भी लगातार गिर रही है। हवा में बढ़ता प्रदूषण सांस के मरीजों के साथ पहाड़ों की तरफ रहने वाले लोगों के लिए भी परेशानी का सबब बन रहा है। पर्यावरण से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि हिमालयी राज्य के लिए यह चेतावनी का संकेत है और समय रहते ठोस कदम उठाना जरूरी है।