उत्तरकाशी। मंगलवार की शाम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक शाम सात बजकर 30 मिनट 10 सेकंड पर रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.6 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी के मोरी ब्लॉक के निकट उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर जमीन के अंदर 5 किलोमीटर की गहराई पर रहा। झटके आने पर कुछ गांवों में लोग घरों से बाहर निकले, लेकिन कम तीव्रता के चलते किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं मिली।
एटीवी भारत के अनुसार भूकंप के झटके हिमाचल प्रदेश के कुछ इलाकों तक भी महसूस किए गए। जिला प्रशासन ने बताया कि स्थिति की निरंतर निगरानी की जा रही है और अब तक किसी प्रकार की हानि की सूचना नहीं मिली है।
कब और कहां दर्ज हुआ भूकंप
आ तक के मुताबिक भूकंप मंगलवार, 14 अक्टूबर को शाम सात बजकर 30 मिनट 10 सेकंड पर आया। भूकंप का केंद्र 31.15 अक्षांश और 77.99 देशांतर पर स्थित था, जो उत्तराखंड के अंतर्गत आता है। भूकंप की गहराई पांच किलोमीटर दर्ज की गई। तीव्रता कम होने के कारण झटके तीव्र नहीं थे, हालांकि उत्तरकाशी में लोगों में हलचल जरूर देखी गई। जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।
कम गहराई बनी चौंकने की वजह
भूकंप विज्ञान में केंद्र की गहराई और सतह पर महसूस होने वाले असर का सीधा संबंध माना जाता है। मोरी के निकट दर्ज हुआ यह भूकंप जमीन के बिल्कुल ऊपरी हिस्से के पास आया, इसलिए तीव्रता चार तीन अंश से कम रहने पर भी झटके आसपास के गांवों तक साफ महसूस हुए। ऊंची पहाड़ियों और ढलान वाले इलाकों में ऐसे झटकों का अनुभव और भी स्पष्ट होता है, जिससे लोगों में चौंकने की स्थिति पैदा होती है।
मोरी ब्लॉक के गांवों में महसूस हुए झटके
एटीवी भारत के मुताबिक मोरी क्षेत्र में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। झटके महसूस होते ही ग्रामीण घरों से बाहर निकले और खुले मैदानों में इकट्ठा हुए। किसी प्रकार की नुकसान की घटना नहीं हुई। प्रशासन की ओर से आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों और संगठनों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।
संवेदनशील क्षेत्र में फिर डोली धरती
उत्तरकाशी जिला भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। पूरा उत्तराखंड भूकंपीय जोन चार और पांच में आता है, जिससे भूकंप का खतरा बना रहता है। इससे पहले भी जिले में कई बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। कम गहराई पर आने वाले भूकंप ऊपरी सतह पर ज्यादा असर डालते हैं, इसलिए छोटी तीव्रता के झटके भी साफ महसूस हो जाते हैं।
1991 के विनाशकारी भूकंप की यादें
आ तक के अनुसार 20 अक्टूबर 1991 को उत्तरकाशी में आया भूकंप गढ़वाल हिमालय का सबसे भीषण भूकंपीय दौर माना जाता है। उस वक्त तीव्रता 6.6 मापी गई थी और उसमें 768 लोगों की जान गई थी, जबकि 5066 लोग घायल हुए थे। 20184 घर पूरी तरह ध्वस्त हुए थे और 74714 घरों को नुकसान पहुंचा था। उस भूकंप के बाद दो महीने के दौरान जिले में 142 बार झटके महसूस किए गए थे। इन हालात में हर नए झटके से लोगों में चिंता देखी जाती है।
प्रशासन अलर्ट, सतर्कता जारी
मंगलवार शाम के झटकों के बाद प्रशासनिक स्तर पर अलर्ट बरकरार है। जिला प्रशासन के मुताबिक भूकंप के बाद उपलब्ध सूचनाओं की पड़ताल की जा रही है ताकि किसी भी क्षेत्र में संभावित नुकसान का पता चल सके। विभागों को अलर्ट रहने और ग्रामीण स्तर पर सूचना व्यवस्था को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञ उत्तरकाशी सहित गढ़वाल हिमालय में छोटे झटकों को आपस में जुड़ी भूकंपीय गतिविधि का हिस्सा मानते हैं, इसलिए इन्हें हल्के में नहीं लिया जाता।