पिथौरागढ़ जनपद में बुधवार दोपहर भूकंप के झटके महसूस किए गए। अमर उजाला के मुताबिक दोपहर 2:50 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.1 मापी गई। झटकों की सूचना जनपद के कनालीछीना, धारचूला और मुनस्यारी विकासखंडों से मिली। अचानक डोलती धरती से लोग कुछ देर के लिए सहम गए, हालांकि अब तक किसी तरह के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।
दोपहर 2:50 बजे आए झटके
संवाद न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार दोपहर करीब 2:50 बजे जनपद में भूकंप के झटके महसूस किए गए। दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में समय का सेकेंड-दर-सेकेंड ब्यौरा देते हुए झटका लेने का समय दोपहर 2 बजकर 50 मिनट 38 सेकेंड बताया है। तीव्रता हल्की होने के बावजूद पहाड़ी इलाकों में झटके साफ अनुभव हुए और भूकंप की खबर देर शाम तक क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही।
केंद्र डीडीहाट और मिर्थी के बीच
जिला आपदा प्रबंधन कक्ष के अनुसार भूकंप का केंद्र डीडीहाट और मिर्थी के बीच करीब पांच किलोमीटर जमीन के अंदर दर्ज गया। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में भी केंद्र मिर्थी क्षेत्र में पांच किलोमीटर गहराई पर होने की बात कही गई है। दोनों रिपोर्टें तीव्रता 3.1 रहने और झटकों के दोपहर दर्ज होने के मामले में एकमत हैं। जमीन के अंदर केंद्र की गहराई कम होने से झटकों की अनुभूति ज्यादा साफ हुई।
अस्कोट से मुनस्यारी तक सहमे लोग
अमर उजाला के मुताबिक अस्कोट, धारचूला और मुनस्यारी क्षेत्रों के लोगों ने भूकंप के झटके साफ महसूस किए। धारचूला भारत-चीन सीमा की आखिरी तहसील है और मुनस्यारी हिमालय की तलहटी में बसा पर्यटन का प्रमुख ठिकाना है। पहाड़ों पर बिखरे गांवों में झटकों की अनुभूति अलग-अलग दर्ज हुई। कहीं लोगों ने इसे तुरंत भूकंप बताया, तो कहीं शुरुआती पलों में इसे समझने में देर लगी।
आपदा प्रबंधन कक्ष की पुष्टि
जिला आपदा प्रबंधन कक्ष के अनुसार भूकंप से जनपद में नुकसान की कोई सूचना नहीं है। किसी भी क्षेत्र से मकानों में दरार आने या जन-संपत्ति को क्षति पहुंचने की पुष्टि नहीं हो पाई। जान-माल के नुकसान की खबर भी नहीं मिली। तीव्रता का पैमाना देखते हुए प्रशासनिक गौर के लिए स्थिति फिलहाल सामान्य दर्ज की गई है।
हल्की श्रेणी का भूकंप
भूकंप विज्ञान में 3 से 3.9 तीव्रता वाले भूकंपों को हल्की श्रेणी में रखा जाता है। इस दर्जे के भूकंपों में आमतौर पर बड़े नुकसान की आशंका नहीं होती, लेकिन पहाड़ी इलाकों में इनके झटके स्पष्ट महसूस होते हैं। तीव्रता 2 के नीचे वाले भूकंप तो आम लोगों को महसूस ही नहीं होते, जबकि 3 के आसपास के झटके घर के अंदर बैठे लोगों तक की अनुभूति में आ जाते हैं।
भूकंपीय संवेदनशील पहाड़
उत्तराखंड हिमालय भूकंपीय संवेदनशीलता की दृष्टि से देश के चिंताजनक जोनों में गिना जाता है और पिथौरागढ़ जनपद इसके सबसे संवेदनशील हिस्सों में आता है। इस क्षेत्र में भूकंप के झटके आना असामान्य घटना नहीं मानी जाती। पहले भी जनपद के विभिन्न हिस्सों में हल्की तीव्रता के भूकंप कई बार दर्ज हुए हैं, जिनमें से अधिकतर का केंद्र हिमालय की गहराइयों में रहा है।
इतिहास गवाह है बड़े झटकों का
उत्तराखंड का हिमालयी हिस्सा इससे पहले भी तबाही वाले भूकंपों का गवाह रहा है। 1991 में उत्तरकाशी और 1999 में चमोली में आए भूकंपों ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। उन घटनाओं के बाद पहाड़ के लोगों में भूकंप को लेकर एक स्थायी सतर्कता रहती है। बुधवार के हल्के झटकों ने उसी पुरानी अनुभूति को फिर से जगा दिया, हालांकि आपदा प्रबंधन कक्ष की जानकारी के मुताबिक इस बार किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।