दीपावली के पर्व के बाद उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2025 अब अपने समापन के चरण में पहुंच गई है। उत्तरकाशी जिले में बसे गंगोत्री धाम के कपाट बुधवार 22 अक्टूबर को अन्नकूट पर्व के दिन शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। मंदिर समिति की घोषणा के बाद से धाम पहुंच रहे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई है और कपाट बंद होने से पहले मां गंगा के दर्शन को भक्तों की भीड़ लगातार बनी रह रही है। हर साल शरदीय नवरात्र के बाद चारों धामों में कपाट बंद करने और मूर्तियों को शीतकालीन प्रवास स्थलों पर ले जाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
गंगोत्री मंदिर समिति की घोषणा
ETV भारत के मुताबिक गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने की तिथि 29 सितंबर को शरदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर निकाली गई थी। इस दौरान बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित मौजूद रहे और पंचांग के अनुसार मुहूर्त तय किया गया। गंगोत्री धाम मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि कपाट 22 अक्टूबर को पूर्वाह्न 11 बजकर 36 मिनट पर अभिजीत मुहूर्त में विधि-विधान से बंद किए जाएंगे। इसके बाद मां गंगा के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास स्थल पर होंगे।
यमुनोत्री का मुहूर्त भैया दूज पर
परंपरा के अनुसार यमुनोत्री धाम के कपाट भैया दूज के दिन बंद होते हैं। इस बार भैया दूज गुरुवार 23 अक्टूबर को है। एनडीटीवी के मुताबिक यमुनोत्री के कपाट दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। यमुनोत्री मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया था कि कपाट बंद करने का मुहूर्त विजयादशमी 2 अक्टूबर को परंपरानुसार निकाला गया।
मुखबा और खरसाली में होंगे शीतकालीन दर्शन
कपाट बंद होने के बाद श्रद्धालु शीतकालीन प्रवास स्थलों पर माताओं के दर्शन कर सकेंगे। मंदिर के पुरोहित राकेश सेमवाल के अनुसार गंगा जी की उत्सव मूर्ति के दर्शन मुखबा गांव में और यमुना जी की उत्सव मूर्ति के दर्शन खरसाली गांव में होंगे। दोनों गांव उत्तरकाशी जिले की घाटी में हैं और हर शीतकाल में यहीं माताओं का छह महीने का प्रवास रहता है।
डोली यात्रा की परंपरा
गंगोत्री में कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की भोग मूर्ति को डोली में बिठाकर मुखबा के लिए रवाना किया जाएगा। मंदिर समिति के मुताबिक अगले दिन यानी 23 अक्टूबर को यह मूर्ति मुखबा स्थित मंदिर में विराजमान कर दी जाएगी। यमुनोत्री की परंपरा में खरसाली गांव से शनि महाराज की डोली धाम पहुंचती है और उन्हीं के नेतृत्व में मां यमुना की डोली खरसाली लौटती है।
अखंड ज्योति की मान्यता
मंदिर परंपरा के मुताबिक गंगोत्री के कपाट बंद होने के बाद भी गर्भगृह में अखंड ज्योति जलती रहती है। मान्यता है कि अगले वर्ष अक्षय तृतीया के दिन जब कपाट खुलेंगे, उस समय श्रद्धालु इसी ज्योति के दर्शन का सौभाग्य पाते हैं। भारी ठंड और बर्फबारी के बीच यह ज्योति पूरे शीतकाल जलती रहती है।
अप्रैल में खुले थे धामों के कपाट
इस वर्ष की चारधाम यात्रा 30 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलने से शुरू हुई थी। 2 मई को केदारनाथ और 4 मई को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट बंद होने के साथ ही यात्रा के पहले दो धामों का यह सीजन समाप्त हो जाएगा।
कपाट बंदी से पहले विशेष पूजा
अन्नकूट से पहले धाम में श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी है। पुरोहितों के मुताबिक कपाट बंद होने से पहले मां गंगा की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी और गंगा घाट पर अभिषेक व आरती का आयोजन होगा। मौसम पूरी तरह बिगड़ने से पहले दर्शन करने के लिए अगले दो दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।