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देहरादून

देहरादून में चला बुलडोजर, 111 अवैध भवन ध्वस्त, 11 हेक्टेयर भूमि कब्जा मुक्त

देहरादून के शक्ति नगर और विकासनगर में प्रशासन ने सरकारी भूमि पर बने 111 अवैध भवन ध्वस्त किए और 11 हेक्टेयर भूमि कब्जा मुक्त कराई। अभियान आगे भी जारी रहेगा।

देहरादून में सरकारी भूमि पर कब्जों के खिलाफ प्रशासन का बुलडोजर चला। हिमाचल बॉर्डर से लगे शक्ति नगर किनारे डाक पत्थर से कुल्हाल तक भारी पुलिस फोर्स के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इस दौरान 11 हेक्टेयर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया, जिस पर 111 अवैध भवन बने हुए थे।

एसडीएम ने दी जानकारी

एसडीएम विनोद कुमार के मुताबिक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने का अभियान चलाया जा रहा है। जिलाधिकारी के आदेश पर यह कार्रवाई सुबह शुरू की गई। अधिकारियों के मुताबिक जिस भूमि को कब्जा मुक्त कराया गया, उस पर कुछ धार्मिक संरचनाएं भी बनी हुई थीं।

विरोध के बीच हटाया कब्जा

कार्रवाई के दौरान कई जगह विरोध प्रदर्शन भी हुए। विकासनगर में यूजेवीएनएल की भूमि पर अवैध कब्जों को हटाए जाने के दौरान एक व्यक्ति अचानक मकान की छत पर चढ़ गया। पुलिसकर्मियों को जेसीबी मशीन में बैठकर छत तक पहुंचना पड़ा और किसी तरह उसे नीचे उतारा गया। इस दौरान महिलाएं और बच्चे रोते-बिलखते नजर आए तथा एक महिला जेसीबी के आगे आकर लेट गई।

पछवादून में बड़े पैमाने पर कब्जे

अधिकारियों के मुताबिक पछवादून क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों ने सरकारी भूमि पर कब्जे किए हुए हैं। इन कब्जों को हटाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कार्रवाई के लिए पहले से ही क्षेत्र की पहचान की गई थी और भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा। उनके मुताबिक अब तक करीब दस हजार एकड़ भूमि को कब्जों से मुक्त कराया जा चुका है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

भूमि विवाद की पुरानी पृष्ठभूमि

इस इलाके में सरकारी भूमि पर कब्जे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। कई अवैध निर्माणों के कारण सरकारी भूमि की पहचान भी मुश्किल हो रही थी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर चिह्नित भूमि खाली कराई गई है और आने वाले दिनों में अन्य इलाकों में भी ऐसी कार्रवाई की जाएगी।

प्रभावितों की चिंता

ध्वस्तीकरण के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने की व्यवस्था का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन का कहना है कि अवैध कब्जों पर किसी तरह का मुआवजा देय नहीं है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि राहत की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने से लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। प्रभावितों का कहना है कि उन्हें पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया और सुबह अचानक कार्रवाई शुरू कर दी गई।

अभियान की रणनीति

कार्रवाई से पहले प्रशासन ने स्थिति का पूरा जायजा लिया और विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई। राजस्व विभाग की टीमों ने भूमि की पैमाइश कर चिह्नित हिस्से को खाली कराया। जिला प्रशासन के मुताबिक आने वाले दिनों में अन्य इलाकों में भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।