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चंपावत

नेपाल हिंसा का असर: बनबसा बॉर्डर बाजार बंद, रोज 50 लाख का कारोबार ठप

नेपाल के जेन-जेड आंदोलन की हिंसा के बाद बनबसा बॉर्डर बाजार बंद हैं और मैत्री बस सेवा ठप है, व्यापारियों के मुताबिक रोज करीब 50 लाख रुपये का कारोबार बाधित है।

चंपावत। नेपाल में जेन-जेड आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा की मार अब भारत की तरफ के सीमावर्ती बाजारों पर साफ दिख रही है। ईटीवी भारत की 13 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक बनबसा समेत बॉर्डर से लगे बाजार सूने बैठे हैं और व्यापारियों का अनुमान है कि रोजाना करीब 50 लाख रुपये का कारोबार बाधित हो रहा है। बाजार सूने होने से सीमा कस्बे की रोज की रौनक भी गायब हो चुकी है।

यह तनाव 8 सितंबर के बाद बढ़ा, जब सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ छात्र-युवाओं के नेतृत्व वाले प्रदर्शन हिंसक हो गए और ईटीवी भारत के मुताबिक प्रदर्शनों के दबाव में नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने 9 सितंबर को इस्तीफा दे दिया। उसी दिन नेपाल में हिंसक प्रदर्शन की खबरों के बीच उत्तराखंड के बॉर्डर पर अलर्ट जारी हुआ और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुरक्षा को लेकर निर्देश दिए। ईटीवी भारत के अनुसार अगले दिन जेन-जेड प्रदर्शन की आग उत्तराखंड की सीमा तक पहुंच गई, नेपाल में कर्फ्यू लगा और 10 सितंबर तक भारत-नेपाल सीमा सील कर दी गई। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की गश्त बढ़ा दी गई और नेपालियों से देश लौटने की अपील की गई।

सीमा सील, मैत्री बस सेवा ठप

सीलबंदी का असर आवागमन पर सबसे पहले दिखा। एबीपी न्यूज़ ने 11 सितंबर को बताया कि बॉर्डर सील होने से भारत-नेपाल मैत्री बस सेवा बंद हो गई है और कारोबार ठप पड़ा है। इनएक्स्ट लाइव ने 12 सितंबर को ‘भारत-नेपाल मैत्री बस सेवा पर ब्रेक’ शीर्षक से इसकी पुष्टि की। बता दें कि शारदा नदी किनारे बसा बनबसा, जहां बैराज भी है, उत्तराखंड और नेपाल के बीच सबसे बड़े व्यापारिक और आवागमन केंद्रों में से एक है। यहां से रोजाना बड़ी संख्या में लोग दोनों देशों में आते-जाते हैं और सीमा के दोनों ओर का कारोबार इसी आवाजाही पर टिका है।

रोज की कमाई पर सीधी मार

बाजार बंद रहने का झटका सबसे ज्यादा उन पर पड़ा है जो रोज कमाकर रोज गुजारा चलाते हैं। स्थानीय व्यापारियों और व्यापार मंडल के मुताबिक रोजाना करीब 50 लाख रुपये का कारोबार करने वाली यह अर्थव्यवस्था अचानक ठप हो गई है।

  • सीमावर्ती बाजारों में सामान की खरीद-बिक्री पूरी तरह ठप हो गई है
  • ढुलाई मजदूरों और परिवहन कारोबारियों की रोज की कमाई बंद पड़ी है
  • होटल और छोटे दुकानदारों के ग्राहक तेजी से घट गए हैं
  • रोजमर्रा की जरूरतों का सामान कई जगह महंगा या अनुपलब्ध हो गया है

प्रशासन की निगरानी, सुरक्षा इंतजाम

जिला प्रशासन के मुताबिक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है। सीमा पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं। ईटीवी भारत के अनुसार टनकपुर में भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी की नई बॉर्डर आउटपोस्ट के लिए वन विभाग ने जमीन उपलब्ध करा दी है।

संकट के बीच राहत की राह

राजनीतिक स्तर पर भी बदलाव के संकेत दिखे। पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बन गईं और अमर उजाला की 13 सितंबर की चंपावत से फाइल रिपोर्ट के मुताबिक इससे आम नेपाली में खुशी का माहौल है। व्यापारियों का कहना है कि स्थिति सामान्य होने तक कारोबार ठप रहेगा। अधिकारियों के मुताबिक हालात सुधरने पर बाजार फिर खोले जाएंगे और सीमा पर आवाजाही बहाल हो जाएगी।