पिथौरागढ़। सीमांत जिले पिथौरागढ़ में राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण अगले वर्ष मार्च तक पूरा हो जाएगा। प्रदेश सरकार ने इसके लिए समयबद्ध लक्ष्य तय किया है और निर्माण कार्य अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। पेयजल निगम की नवीनतम प्रगति रिपोर्ट के मुताबिक परिसर के प्रमुख ब्लॉकों का काम 70 से 95 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। मेडिकल कॉलेज तैयार होने का सीधा लाभ यह होगा कि सीमांत के लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए हल्द्वानी या बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।
किन ब्लॉकों का कितना काम पूरा
प्रगति रिपोर्ट के अनुसार फैकल्टी ब्लॉक, लैबोरेट्री ब्लॉक और परीक्षा-लेक्चर थिएटर ब्लॉक का 65 से 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक में करीब 45 प्रतिशत निर्माण हुआ है। अस्पताल परिसर की बात करें तो इमरजेंसी ब्लॉक नब्बे प्रतिशत तक बन चुका है, जबकि आईपीडी-वन का 75 प्रतिशत काम पूरा है। ओपीडी-दो, जूनियर रेजिडेंट हॉस्टल और इंटर्न हॉस्टल का निर्माण जारी है।
हॉस्टल और आवासीय ब्लॉकों में सबसे तेज रफ्तार
हॉस्टल भवनों में निर्माण की रफ्तार सबसे तेज रही है। बॉयज हॉस्टल का नब्बे प्रतिशत और गर्ल्स हॉस्टल का अस्सी प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। आवासीय ब्लॉकों में टाइप-छह और टाइप-चार श्रेणियों का 85 से 96 प्रतिशत निर्माण हो चुका है। इससे डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, फैकल्टी और छात्रों को रहने की बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी। प्रशासनिक मानें तो आवासीय इकाइयों का समय पर तैयार होना कॉलेज के सुचारू संचालन की पहली शर्त है।
निर्माण के बाद शुरू होगी फैकल्टी नियुक्ति की प्रक्रिया
भवन निर्माण पूरा होने के बाद मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी नियुक्ति और संचालन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। शासन की कोशिश है कि जिले में चिकित्सा शिक्षा का विस्तार हो और युवाओं को अपने ही जिले में डॉक्टरी की पढ़ाई का अवसर मिले। अधिकारियों के मुताबिक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद यह परियोजना तय समयसीमा की ओर बढ़ रही है।
मॉडल मेडिकल इंस्टिट्यूट बनाने की दिशा में काम
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार के मुताबिक पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य सिर्फ एक मेडिकल कॉलेज बनाना नहीं, बल्कि इसे राज्य का मॉडल मेडिकल इंस्टिट्यूट बनाना है। इसके लिए कार्यदायी संस्था को निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित हो, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में इलाज और चिकित्सा शिक्षा दोनों को मजबूती मिल सके।
छात्रों को मिलेगा अपने जिले में पढ़ाई का विकल्प
मेडिकल कॉलेज के संचालन के बाद इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। फिलहाल सीमांत के अभ्यर्थियों को एमबीबीएस की पढ़ाई और विशेषज्ञ इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है। अधिकारियों का मानना है कि संस्थान शुरू होने से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती
अधिकारियों के मुताबिक निर्माण पूरा होने के बाद फैकल्टी और स्टाफ की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिससे ओपीडी से लेकर भर्ती मरीजों के इलाज तक की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। सरकार का प्रयास है कि भवन तैयार होने के साथ ही संस्थान का संचालन शुरू हो जाए और सीमांत के लोगों को विशेषज्ञ उपचार के लिए बाहर न जाना पड़े।