पौड़ी। जिले के विकासखंड कोट के देवार गांव में आंगनबाड़ी केंद्र से घर लौट रहे चार वर्षीय मासूम पर दिनदहाड़े गुलदार के हमले से इलाके में दहशत फैल गई है। घटना के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने क्षेत्र के छह आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन दिन तक अवकाश घोषित कर दिया है। नौनिहालों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और वन विभाग के साथ समीक्षा के बाद ही आंगनबाड़ी केंद्र खोलने या अवकाश बढ़ाने पर निर्णय लिया जाएगा।
कार्यकर्ता ने दिखाई सूझबूझ
जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल के मुताबिक आंगनबाड़ी केंद्र देवार की कार्यकर्ता सुषमा ने गुलदार के हमले से नौनिहाल को बचाने में सराहनीय भूमिका निभाई। विभाग ने उनके साहस की प्रशंसा की है। घटना के बाद आंगनबाड़ी केंद्र देवार के साथ वड्डा, चमना, कांडा, नवन और बुरांसी में भी तीन दिन का अवकाश घोषित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और खतरे का आकलन करने के बाद ही अगला फैसला लिया जाएगा।
ग्रामीणों का आक्रोश, मिला चेतावनी भरा संदेश
गांव में हमले की खबर फैलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में आक्रोश पैदा हो गया। ग्रामीणों ने गढ़वाल वन प्रभाग की एसडीओ आयशा बिष्ट से मुलाकात कर गुलदार को आदमखोर घोषित कर मारने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिनदहाड़े हुई इस घटना से क्षेत्र में दहशत है और लोग डर के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि गुलदार को मारने का आदेश जल्द जारी नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर सभासद गौरव सागर, बीडीसी सदस्य प्रेम सिंह सहित कई ग्राम प्रधान और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
प्रशासन अलर्ट पर, बढ़ाई गई निगरानी
बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन और वन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदोरिया ने गुलदार की अधिक गतिविधि वाले क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के आसपास कैमरा ट्रैप लगाने तथा पिंजरे स्थापित करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। वन विभाग और पुलिस को प्रभावित इलाकों में गश्त बढ़ाने को कहा गया है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए जारी हुआ परामर्श
ग्रामीणों को सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं। इनमें बच्चों और बुजुर्गों को अकेले घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वन्यजीवों की सक्रियता वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरतें और किसी भी हलचल की सूचना तुरंत वन विभाग या पुलिस को दें। प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र ने इलाके में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गुलदार को मारने के आदेश जारी कर दिए हैं।
गांव में डर का माहौल
ग्रामीणों के मुताबिक दिनदहाड़े हुए हमले के बाद बच्चों में डर है और कई अभिभावक उन्हें आंगनबाड़ी या स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। महिलाएं और बुजुर्ग दिन में भी अकेले घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। क्षेत्र में दहशत का माहौल है और लोग वन विभाग से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
मानव-वन्यजीव टकराव बनी बड़ी चुनौती
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में जंगलों से सटे गांवों में मानव और वन्यजीव के बीच टकराव के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। गुलदार और भालू जैसे वन्यजीव रिहायशी इलाकों के करीब पहुंच जाते हैं, जिससे आए दिन हमलों की घटनाएं होती हैं। ऐसे में वन विभाग पर निगरानी और जन-जागरूकता दोनों का दबाव बढ़ जाता है।