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कृषि

मध्य प्रदेश की मिट्टी में खिला उत्तराखंड का राजमा, उज्जैन के किसान ने चित्रा किस्म से कमाया मोटा मुनाफा

उज्जैन के किसान राजेश रंगवाल ने उत्तराखंड की चित्रा किस्म का राजमा उगाकर अच्छी कमाई की है। दो ही सिंचाई में सौ दिन में तैयार हो जाती है यह फसल।

उत्तराखंड के पहाड़ों का राजमा अब मध्य प्रदेश के मैदानी इलाके में भी किसानों की किस्मत बदल रहा है। दैनिक भास्कर के मुताबिक उज्जैन जिले के घटिया तहसील के बिछड़ोद खालसा गांव निवासी किसान राजेश रंगवाल ने उत्तराखंड की चित्रा किस्म का राजमा उगाकर खेती को मुनाफे का सौदा बना दिया है। दूसरी फसलों के मुकाबले इसमें लागत कम आती है और जोखिम भी न के बराबर रहता है। किसान की इस नवाचारी पहल से क्षेत्र के अन्य किसानों में भी इस फसल को अपनाने की रुचि जागी है।

चित्रा किस्म का चयन

किसान रंगवाल का कहना है कि वे ऐसी किस्म बोना चाहते थे जिसमें खर्च सबसे कम हो और जोखिम न के बराबर हो। दैनिक भास्कर के अनुसार काफी पूछताछ और पड़ताल के बाद उन्होंने उत्तराखंड की चित्रा किस्म का चयन किया। इस किस्म का बीज 350 रुपये किलो में मिल जाता है। बीज की उपलब्धता और खर्च दोनों के लिहाज से यह किस्म उन्हें मैदानी इलाकों के लिए उपयुक्त लगी।

सौ दिन और दो सिंचाई में फसल तैयार

इस फसल की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज तैयारी है। भास्कर के मुताबिक चित्रा राजमा सिर्फ दो सिंचाई में ही सौ दिन के भीतर पककर तैयार हो जाती है, यानी पानी की खपत भी कम और समय की बचत भी। प्रति बीघा फसल पर करीब 20 हजार रुपये की लागत आती है और इसके बदले किसान को सीधे 13 हजार रुपये तक का फायदा हो जाता है। कम खर्च और बेहतर रिटर्न का यही गणित इस फसल को आकर्षक बनाता है।

गोबर खाद से बढ़ती उर्वरक शक्ति

चित्रा राजमा में खाद के तौर पर गरड़ यानी गोबर खाद का इस्तेमाल होता है, जो गांव में लगभग मुफ्त में उपलब्ध हो जाती है। जागरूक किसान बताते हैं कि इससे मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ती है और पौधों को बेहतर जैविक पोषण मिलता है। दैनिक भास्कर के अनुसार अन्य फसलों में कीटनाशक छिड़काव के बाद भी 25 से 30 फीसदी तक फसल खराब होने की आशंका बनी रहती है, जबकि चित्रा राजमा में ऐसा खतरा नहीं देखा गया और फसल सुरक्षित रहती है।

मौसम और जानवरों का खतरा नहीं

जी न्यूज़ के अनुसार इस फसल की एक और खास बात यह है कि इसे न गायें चरती हैं और न ही जंगली जानवर नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में फसल की रखवाली पर कोई अलग खर्च नहीं करना पड़ता। ज्यादा सर्दी पड़ने पर भी इस फसल को कोई खास नुकसान नहीं होता, जिससे मौसम की चिंता भी किसान के सिर से उठ जाती है। बारिश या सूखे जैसी परिस्थितियों में भी यह फसल काफी हद तक सुरक्षित रहती है।

पोषण से भरपूर, बाजार में बनी मांग

चित्रा राजमा में फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन अच्छी मात्रा में पाया जाता है। जी न्यूज़ के मुताबिक यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है और किसान को उपज बेचने में दिक्कत नहीं आती। घरेलू खपत से लेकर होटलों तक में राजमा की स्थायी मांग इस फसल को व्यावसायिक दृष्टि से फायदेमंद बनाती है। बढ़ती सेहतमंद खान की प्रवृत्ति ने इसकी मांग को और मजबूत किया है।

सीखने के लिए आ रहे अन्य किसान

किसान राजेश रंगवाल कहते हैं कि उनकी सफलता देखकर अब खेती के गुर सीखने के लिए अन्य किसान भी उनके पास आने लगे हैं। भास्कर के मुताबिक सही फसल और बीज के चयन पर बारीकी से ध्यान देकर तथा योजनाबद्ध तरीके से काम करते हुए किसान कम पानी और कम खर्च में भी भरपूर फसल ले सकता है। उत्तराखंड की यह पहाड़ी किस्म अब मालवा के खेतों में अपनी पहचान बना रही है और नए प्रयोग करने वाले किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।