उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस वर्ष मानसून की आपदाओं के बावजूद बड़े आंकड़े छू चुकी है। aapkavichar.com के मुताबिक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को कहा कि इस साल कई आपदाएं आईं, लेकिन इसके बावजूद यात्रा का दूसरा चरण बहुत अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 46 लाख श्रद्धालुओं का आंकड़ा पार हो गया है और केदारनाथ धाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 16 लाख तक पहुंच गई है।
अप्रैल के अंत में खुले थे कपाट
theliberalworld.com के अनुसार इस वर्ष चारधाम यात्रा की शुरुआत 30 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट खुलने के साथ हुई। इसके बाद रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई को खुले, जबकि चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट 4 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री और यमुनोत्री धाम सबसे पहले यात्रा के लिए तैयार हुए थे।
दूसरे चरण की रफ्तार बरकरार
धामी के मुताबिक इस वर्ष कई आपदाएं आने के बावजूद यात्रा का दूसरा चरण बहुत अच्छी तरह से चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि हर श्रद्धालु की यात्रा सुरक्षित और सुखद रहे। यात्रा में अभी कई दिन बाकी होने से श्रद्धालुओं की संख्या में और बड़ा इजाफा होने की उम्मीद जताई गई है।
मानसून ने बाधित की थी यात्रा
मानसून के दौरान भारी वर्षा, बादल फटने और भूस्खलन ने तीर्थयात्रा को बुरी तरह बाधित किया था। गंगोत्री धाम के रास्ते में पड़ने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव धराली प्राकृतिक आपदा से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। सड़कें क्षतिग्रस्त होने से गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी थी। बारिश थमने के बाद भी यात्रा बहाल करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनी रही।
दोनों धामों की यात्रा फिर से शुरू
प्रशासनिक टीमों ने सामान्य स्थिति बहाल करने और यात्रा मार्गों को दोबारा खोलने के लिए युद्धस्तर पर काम किया। इसके बाद गंगोत्री और यमुनोत्री, दोनों धामों की तीर्थयात्राएं कड़े सुरक्षा उपायों के साथ फिर से शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यात्रा में अभी कई दिन बाकी हैं और उन्हें विश्वास है कि आने वाले दिनों में श्रद्धालु बहुत बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचेंगे।
सुरक्षा प्राथमिकता, अधिकारियों को निर्देश
मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा से जुड़े सभी जिला अधिकारियों को तीर्थयात्रियों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्गों पर सभी आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्थाएं लगातार बनाए रखी जाएं। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए सभी अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
खराब मौसम में संभलकर चलें रास्ते
प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को लगातार सतर्क रहने का आग्रह किया जा रहा है। तीर्थयात्रियों को बार-बार सलाह दी जा रही है कि वे खराब मौसम में यात्रा करने से बचें और अगर वे रास्ते में हों तो सुरक्षित स्थानों पर शरण लें। अधिकारियों का कहना है कि मौसम के मिजाज पर निगरानी रखते हुए यात्रा को निरंतर सुचारू रखा जा रहा है।