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देहरादून

राष्ट्रपति मुर्मू ने विधानसभा विशेष सत्र को किया संबोधित, रजत जयंती पर महिला सशक्तिकरण को बताया राज्य की ताकत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तराखंड की रजत जयंती पर विधानसभा विशेष सत्र को संबोधित किया और राज्य की 25 वर्ष की विकास यात्रा की सराहना की।

देहरादून। राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर सोमवार को उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संबोधित किया। ईटीवी भारत के मुताबिक वे सुबह लगभग 11 बजे विधानसभा पहुंचीं और लगभग 30 मिनट तक सदन को संबोधित किया। लोकतंत्र के मंदिर में पहुंचकर उन्होंने राज्य की जनता के साथ वर्तमान और पूर्व विधायकों को 25 साल की उपलब्धियों भरी यात्रा पर बधाई दी।

25 साल की विकास यात्रा की चर्चा

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि वर्ष 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में उत्तराखंड की स्थापना जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप हुई थी। तब से अब तक राज्य ने पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल और भौतिक कनेक्टिविटी के क्षेत्र में राज्य ने तेजी से विकास किया है, जिससे मानव विकास सूचकांकों में भी सुधार आया है।

दूरदर्शन समाचार के मुताबिक राष्ट्रपति ने कहा कि 25 साल की इस यात्रा में राज्य ने विकास के प्रभावशाली लक्ष्यों को हासिल किया है और अनेक क्षेत्रों में सराहनीय प्रगति दर्ज की है।

साक्षरता और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार

दूरदर्शन समाचार के अनुसार राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हुई है कि राज्य में साक्षरता बढ़ी है और महिलाओं की शिक्षा में विस्तार हुआ है। मातृ और शिशु मृत्यु दर में पहले के मुकाबले कमी आई है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है।

महिला सशक्तिकरण को बताया राज्य की ताकत

उनके भाषण में महिलाओं का जिक्र सबसे अधिक रहा। राष्ट्रपति ने कहा कि सुशीला बलूनी, बछेंद्री पाल, गौरा देवी, राधा भट्ट और वंदना कटारिया जैसी असाधारण महिलाओं ने राज्य का नाम रोशन किया है और इनकी गौरवशाली परंपरा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। उन्होंने ऋतु खंडूड़ी भूषण को राज्य की पहली महिला अध्यक्ष बनाकर विधानसभा का गौरव बढ़ाने का भी उल्लेख किया और कहा कि आने वाले वर्षों में सदन में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ेगी।

शौर्य और अध्यात्म की धरती को नमन

राष्ट्रपति ने कहा कि यह देवभूमि सदियों से अध्यात्म और शौर्य की परंपराओं से ओत-प्रोत रही है। यहां के युवाओं में सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का उत्साह सदैव बना रहता है। कुमाऊं और गढ़वाल रेजिमेंट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।

समान नागरिक संहिता के निर्णय की सराहना

संविधान निर्माताओं के नीति-निर्देशों के अनुरूप राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के निर्णय की राष्ट्रपति ने सराहना की। ईटीवी भारत के मुताबिक उन्होंने इसे राज्य के सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। सदन में यह बात भी उल्लेखनीय रही कि राज्य की जनता ने 25 वर्षों में विकास और शौर्य का नया अध्याय गढ़ा है।

मुख्यमंत्री ने दी रजत जयंती की जानकारी

राष्ट्रपति के संबोधन से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन में कहा कि 9 नवंबर को उत्तराखंड अपनी राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे करने जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति के विधानसभा पहुंचने को राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया और कहा कि यह अवसर राज्य की जनता की उपलब्धियों को राष्ट्रीय मंच पर पहचान देगा।