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पिथौरागढ़

पिथौरागढ़: भूस्खलन से बंद हुईं दो दर्जन सड़कें, आदि कैलाश यात्रा प्रभावित

पिथौरागढ़ में लगातार बारिश और भूस्खलन से दो दर्जन से ज्यादा सड़कें बंद हैं। आदि कैलाश यात्रा के अगले चरण पर रोक, प्रशासन मलबा हटाने में जुटा है।

पिथौरागढ़। लगातार हो रही बारिश और इससे जुड़े भूस्खलन के चलते जिले में दो दर्जन से ज्यादा सड़कें बंद हो गई हैं। प्रशासन के मुताबिक पहाड़ों से आया मलबा और कई जगह सड़क धंसने से अलग-अलग मार्गों पर आवाजाही ठप पड़ी है। सबसे बड़ा असर आदि कैलाश यात्रा पर देखने को मिला है, जिसका अगला चरण रिपोर्ट के मुताबिक इस बीच रुक गया है। पहाड़ी इलाकों के कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है, जिससे रोज की आवाजाही और जरूरी सामान की सप्लाई दोनों प्रभावित हुई हैं।

जिले के दूरस्थ इलाकों में आवाजाही ठप

जनपद में सबसे ज्यादा असर दुर्गम तहसीलों और ग्रामीण मार्गों पर पड़ा है। धारचूला और मुनस्यारी की ओर जाने वाले रास्तों पर मलबा हटाने का काम जारी है, लेकिन बीच-बीच में गिरते पत्थर और बार-बार बिगड़ते मौसम ने राहत कार्य की रफ्तार धीमी कर दी है। कई गांवों में बच्चों के स्कूल जाने और किसानों की मंडियों तक पहुंचने में दिक्कत आ रही है। विभाग की ओर से बंद मार्गों की जानकारी लगातार जुटाई जा रही है, ताकि प्राथमिकता के हिसाब से बहाली का काम आगे बढ़ाया जा सके।

मानसून के आखिरी दौर में हिमालयी जिलों की ढलानें पानी से तर रहती हैं, ऐसे में थोड़ी सी तेज बारिश भी पहाड़ों को अस्थिर कर देती है। कमजोर बुनियादी ढांचा और ढलानों पर बढ़ता निर्माण इस समस्या को और गहरा देता है, जिससे भूस्खलन का दायरा बरस-दर-बरस बढ़ता जा रहा है।

आदि कैलाश यात्रा पर ब्रेक

आदि कैलाश यात्रा उत्तराखंड की सबसे दुर्गम और महत्वपूर्ण तीर्थयात्राओं में से एक है। कैलाश मानसरोवर के लिए विदेश जाने वाले श्रद्धालु इसे विकल्प मानते हैं। जिले के धारचूला क्षेत्र के जोलिंगकोंग और नाबी-कुटी घाटी से होकर इस यात्रा का रास्ता गुजरता है, जहां ओम पर्वत के दर्शन के लिए हर साल देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मौजूदा हालात में सड़कों के बंद होने से यात्रा के अगले चरण पर ब्रेक लग गया है और श्रद्धालुओं की आने-जाने की योजनाएं अस्त-व्यस्त हो गई हैं।

मलबा हटाने में जुटा प्रशासन

प्रशासन और लोक निर्माण विभाग ने प्रभावित मार्गों पर मशीनरी लगाकर मलबा हटाने और सड़कें बहाल करने का काम शुरू कर दिया है। जिन इलाकों में आवाजाही ठप हुई है, वहां प्रभावित लोगों के ठहराव और जरूरी राहत की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम खुलते ही सभी बंद मार्गों को बहाल करने की कोशिश की जाएगी और प्राथमिकता उन रास्तों को दी जाएगी जहां सबसे ज्यादा गांव कटे हुए हैं।

सतर्कता की अपील

मौसम विभाग की ओर से पहाड़ी जिलों में बारिश का अनुमान जारी रहने के बीच यात्रियों और श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की पुष्टि जरूर करें और बिना जानकारी किसी बंद रास्ते की ओर न बढ़ें। पिथौरागढ़ के जंगली ढलानों पर बारिश के बाद भूस्खलन का खतरा दिनों तक बना रहता है, इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।