उत्तराखंड उच्च न्यायालय के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने शनिवार को देहरादून स्थित लोक भवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह (सेनि) ने उन्हें उत्तराखंड उच्च न्यायालय का 15वां मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन देहरादून के लोक भवन में किया गया, जिसमें राज्य के शीर्ष नेतृत्व और न्यायपालिका के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
राष्ट्रपति का अधिपत्र पढ़कर सुनाया मुख्य सचिव
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता को उत्तराखंड उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने से संबंधित अधिपत्र पढ़ा। इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
समारोह में शामिल हुए ये गणमान्य
जागरण के मुताबिक इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आशीष नैथानी, प्रथम महिला गुरमीत कौर, कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
14वें मुख्य न्यायाधीश की जगह ली
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता उत्तराखंड हाईकोर्ट के 15वें मुख्य न्यायाधीश बने हैं। इससे पहले इस पद पर रहे न्यायमूर्ति गुहानाथन नरेंद्र शुक्रवार को 62 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त हो गए थे। भास्कर की रिपोर्ट में प्रकाशित सूची के मुताबिक राज्य के पहले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक ए. देसाई रहे, जिन्होंने नवंबर 2000 में कार्यभार संभाला था।
फुल कोर्ट फेयरवेल रेफरेंस से पहले सेवानिवृत्ति
बता दें कि ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार अपराह्न साढ़े तीन बजे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट कक्ष में न्यायमूर्ति गुहानाथन नरेंद्र के सम्मान में फुल कोर्ट फेयरवेल रेफरेंस आयोजित किया जाना था, जिसमें हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीश, बार काउंसिल और बार एसोसिएशन के पदाधिकारी तथा वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल होने वाले थे।
1987 में शुरू हुआ था वकालत का सफर
जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता का जन्म 9 अक्टूबर 1964 को हुआ था। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से 1987 में एलएलबी की डिग्री प्राप्त की और 6 दिसंबर 1987 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया। वकालत के दौरान उन्होंने मुख्य रूप से सिविल, संवैधानिक और किराया नियंत्रण से जुड़े जटिल कानूनी मामलों पर ध्यान केंद्रित किया और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई।
कॉलेजियम की सिफारिश के बाद मिली नियुक्ति
नवभारत टाइम्स के अनुसार सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 दिसंबर 2025 को उन्हें चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की थी, जिसकी घोषणा केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने की थी। रिपोर्ट के मुताबिक वे 12 अप्रैल 2013 को जस्टिस के तौर पर नियुक्त हुए थे।
नई अगुवाई में जारी रहेगा न्यायिक कार्य
दैनिक भास्कर के अनुसार हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता की ओर से जारी नोटिस के अनुसार ही शपथ ग्रहण कार्यक्रम की तैयारियां की गई थीं। नए मुख्य न्यायाधीश के कार्यभार ग्रहण के साथ ही नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायिक कार्य नई अगुवाई के तहत जारी रहेगा। राज्य की न्यायपालिका के लिए यह नया अध्याय शुरू हुआ है।