हरिद्वार और नैनीताल की अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। धमकी भरा पत्र मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद दोनों जिलों की अदालतों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
धमकी कैसे मिली
बताया जाता है कि जिला न्यायालय को डाक के जरिए धमकी भरा पत्र मिला। पत्र में अदालत को निशाना बनाने की बात लिखी थी। इसके अलावा नैनीताल स्थित कोर्ट को भी धमकी मिलने की जानकारी सामने आई। पत्र मिलने के बाद न्यायालय परिसर में तनाव का माहौल बन गया।
सुरक्षा में इजाफा
पुलिस ने अदालत परिसरों में सुरक्षा बढ़ा दी है। प्रवेश द्वारों पर कड़ी चेकिंग की जा रही है। आने-जाने वाले वाहनों और लोगों की भी निगरानी रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
जांच की दिशा
पुलिस ने धमकी भरे पत्र की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक पत्र की भाषा और लिखावट की जांच कराई जा रही है। यह भी पड़ताल की जा रही है कि पत्र कहां से भेजा गया। कुछ संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी की जा रही है।
अदालत की कार्यवाही
सुरक्षा चेतावनी के बावजूद अदालतों में कामकाज सामान्य रूप से चलता रहा। न्यायाधीशों और वकीलों ने सतर्कता बरतने की अपील की है। प्रशासन ने न्यायालय परिसर में प्रवेश को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।
पुलिस का बयान
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अफवाह न फैलाने की अपील की है।
अधिवक्ताओं की प्रतिक्रिया
अधिवक्ताओं ने कहा कि अदालत परिसर में तैनाती बढ़ाई जाए। उन्होंने मामले की तेज जांच की मांग की। कुछ वकीलों ने कहा कि इस तरह की धमकियां न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है।
फर्जी धमकी की भी जांच
पुलिस यह भी जांच रही है कि कहीं यह शरारतवश भेजी गई धमकी तो नहीं है। पिछले दिनों भी कुछ संस्थानों को इस तरह के पत्र मिले थे। अधिकारियों के मुताबिक हर पहलू की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। किसी को भी बिना जांच के दोषी नहीं माना जाएगा।
आम लोगों के लिए अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अदालत परिसर में सहयोग करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। सुरक्षा जांच में सहयोग न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय
सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था समय-समय पर दुरुस्त होनी चाहिए। उनका कहना है कि धमकियों को हल्के में लेना ठीक नहीं। तकनीकी निगरानी और प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी जरूरी हैं।
न्यायिक प्रक्रिया पर असर नहीं
अधिकारियों ने साफ किया कि जांच का अदालती कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मामले सुनने का सिलसिला पहले की तरह जारी रहेगा। प्रशासन ने कहा कि न्याय में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी। न्यायालयों के कामकाज की लगातार निगरानी की जाएगी।