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हरिद्वार इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना डीपीआर की राह पर, 75 करोड़ प्रति किलोमीटर आंकी लागत

हरिद्वार की इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना को डीपीआर की राह पर लाने की तैयारी है। अनुमानित लागत लगभग 75 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर आंकी गई है, परियोजना पीपीपी मॉडल पर बनेगी।

हरिद्वार की बहुप्रतीक्षित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना को अब गति मिलती नजर आ रही है। इस परियोजना को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की राह पर लाने की तैयारी है। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने उत्तराखंड मेट्रो रेल कारपोरेशन की इस परियोजना की समीक्षा की। उन्होंने परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। यूपी की जमीन को लेकर परियोजना में अड़चन भी सामने आ रही है।

समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

समीक्षा के दौरान परियोजना की लागत की जानकारी ली गई। सचिव ने सभी प्रक्रियाओं में तेजी लाने को कहा। संबंधित विभागों को समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश दिए गए। सरकार की प्राथमिकता परियोजना को शीघ्र धरातल पर उतारने की है।

75 करोड़ प्रति किलोमीटर लागत

प्रबंध निदेशक ने बताया कि रोपवे की अनुमानित लागत लगभग 75 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर आंकी गई है। इसमें रोपवे स्टेशन, कार्यशाला और भूमि अधिग्रहण शामिल नहीं हैं। जरूरी क्लीयरेंस पर भी अतिरिक्त खर्च होगा। लागत को लेकर विस्तृत आकलन किया जा रहा है।

पीपीपी मॉडल पर संचालन

यह परियोजना पीपीपी मॉडल के तहत संचालित होगी। उत्तराखंड मेट्रो रेल कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा ने परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने परियोजना के सभी पहलुओं की जानकारी दी। इस मॉडल से निवेश और संचालन की व्यवस्था तय होगी।

यूपी की जमीन बनी अड़चन

परियोजना के मार्ग में उत्तर प्रदेश की जमीन आ रही है। सीमा क्षेत्र में भूमि को लेकर मामला उलझा हुआ है। इसके कारण परियोजना को पूरी तरह आगे बढ़ाने में समय लग रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों से बातचीत की जा रही है।

पर्यटन को मिलेंगे पंख

रोपवे बनने से हरिद्वार में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। श्रद्धालुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में आसानी होगी। इससे शहर में आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिलेगा।

बेहतर होगी यातायात व्यवस्था

हरिद्वार में यातायात और पार्किंग की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। रोपवे से सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा। लोग ट्रैफिक में फंसने से बचेंगे। इससे शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर होगी।

श्रद्धालुओं को होगी सुविधा

चारधाम यात्रा और अन्य पर्वों पर हरिद्वार में भारी भीड़ उमड़ती है। रोपवे से श्रद्धालु आसानी से दर्शन स्थलों तक पहुंच सकेंगे। इससे उनका समय और श्रम दोनों बचेगा। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को विशेष सुविधा मिलेगी।

परियोजना का बदलेगा स्वरूप

इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना से शहर का परिवहन स्वरूप बदलेगा। आधुनिक रोपवे सिस्टम से हरिद्वार एक नई पहचान बनाएगा। प्रशासन ने परियोजना को महत्वाकांक्षी बताया है। समय पर काम पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।

प्रशासन की तैयारी

परियोजना को लेकर प्रशासन ने सभी तैयारियां शुरू कर दी हैं। जरूरी क्लीयरेंस के लिए विभागों से समन्वय किया जा रहा है। भूमि संबंधी मामलों को निपटाने पर काम हो रहा है। जल्द ही डीपीआर को मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय कारोबार को मिलेगा फायदा

रोपवे बनने से हरिद्वार में आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। होटल और व्यापारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। शहर में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। स्थानीय लोगों ने परियोजना का स्वागत किया है।