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हरिद्वार अर्ध कुंभ 2027 को कुंभ बनाने के फैसले पर संतों में नाराजगी, सरकार पर सवाल

हरिद्वार में 2027 के अर्ध कुंभ को कुंभ की तरह मनाने के फैसले पर संतों का एक धड़ा नाराज है। महामंडलेश्वरों ने विरोध जताया है और अखाड़ा परिषद ने भी सवाल उठाए हैं।

हरिद्वार में अर्ध कुंभ 2027 को कुंभ की तर्ज पर कराने के राज्य सरकार के फैसले ने संतों के बीच विवाद खड़ा कर दिया है। हरिद्वार में भारत साधु समाज की बैठक में जुटे महामंडलेश्वरों ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया। संतों का कहना है कि सरकार और कुछ संत अपनी सहूलियत के हिसाब से अर्ध कुंभ की परंपराओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

अखाड़ा परिषद ने किया स्वागत

एक तरफ जहां अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने अर्ध कुंभ को कुंभ के तौर पर मनाने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है, वहीं दूसरी तरफ संतों का एक बड़ा धड़ा इस रुख के खिलाफ उतर आया है। इससे साफ है कि अर्ध कुंभ को लेकर साधु-संतों में मतभेद गहरा गया है और मामला सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है।

नासिक में भी प्रस्तावित है कुंभ

भारत साधु समाज की बैठक में शामिल संतों ने कहा कि जिस समय हरिद्वार में अर्ध कुंभ मेला लगेगा, उसी समय नासिक में कुंभ का आयोजन भी प्रस्तावित है। ऐसे में सरकार को सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आज तक चली आ रही परंपराओं का पालन करना चाहिए।

केवल दो जगह लगता है अर्ध कुंभ

देश में अर्ध कुंभ मेला केवल दो स्थानों पर लगता है। पहला हरिद्वार और दूसरा उत्तर प्रदेश का प्रयागराज, जहां इस आयोजन को माघ मेले के नाम से जाना जाता है। हरिद्वार में आयोजित होने वाले मेले को ही अर्ध कुंभ कहा जाता है, जबकि कुंभ मेला देश में चार स्थानों पर आयोजित होता है।

परंपरा पर सवाल उठा रहे संत

बड़ा अखाड़े के महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश का कहना है कि कुंभ और अर्ध कुंभ कराने का फैसला साधु-संतों का रहता है। उनके मुताबिक पूर्ण कुंभ में पेशवाई और धर्मध्वजा का विशेष महत्व होता है और इससे जुड़े सभी निर्णय अखाड़ों के साधु-संत ही लेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार और कुछ संत परंपराओं के साथ छेड़छाड़ न करें तो बेहतर रहेगा।

जूना अखाड़े ने भी जताया विरोध

जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी भी अर्ध कुंभ को पूर्ण कुंभ के रूप में मानने के खिलाफ हैं। उनका मानना है कि अर्ध कुंभ को पूर्ण कुंभ बनाने का कोई औचित्य नहीं है और यह हिंदू समाज के साथ छलावा है।

अखाड़ा परिषद अस्तित्व में नहीं

इस विवाद के बीच यह भी सामने आया है कि वर्तमान समय में अखाड़ा परिषद अस्तित्व में नहीं है और उसके दोनों गुटों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। ऐसे में सभी 13 अखाड़ों के साधु-संत मिलकर 2027 अर्ध कुंभ मेले पर विचार करेंगे।

तैयारियों को दिया जा रहा है अंजाम

दूसरी तरफ सरकार अर्ध कुंभ की तैयारियों को बड़े स्तर पर अंजाम दे रही है। गंगा घाटों को मजबूत करने के साथ कुछ नए घाट भी बनाए जा रहे हैं। अर्ध कुंभ में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं, हालांकि कुंभ की तरह अखाड़ों की पेशवाई नहीं निकलती। मेला क्षेत्र को कई जोन और सेक्टरों में बांटा गया है और पुलिस के लिए कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

केंद्र से मांगी गई है राशि

मेले को भव्य बनाने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से 1000 करोड़ रुपये की मदद मांगी है। इसके अलावा राज्य सरकार भी मेले के लिए अपनी ओर से बड़ा बजट जारी करने जा रही है। मेला अधिकारी लगातार बैठकें कर रहे हैं, क्षेत्र का भ्रमण कर रहे हैं और साधु-संतों से सुझाव ले रहे हैं। अखाड़ों के लिए स्थान भी चिह्नित किए जा रहे हैं।