हरिद्वार। धार्मिक पर्यटन के लिए मशहूर हरिद्वार में अब इतिहास और रोमांच को जोड़ने की तैयारी चल रही है। श्यामपुर इलाके में स्थित ब्रिटिशकालीन जेल को संरक्षित कर इसे एडवेंचर टूरिज्म से जोड़ने की योजना पर पर्यटन विभाग काम कर रहा है। इस इमारत का इतिहास मशहूर डकैत सुल्ताना डाकू से जुड़ा हुआ है, जिसे लोग इंडियन रॉबिन हुड कहते हैं।
सवा सौ साल पुरानी है इमारत
श्यामपुर में मौजूद यह इमारत आज जर्जर और खंडहर नुमा नजर आती है, लेकिन एक समय में अंग्रेज यहां से कानून व्यवस्था संभालते थे। करीब सवा सौ साल पुरानी इस इमारत का उपयोग जेल और थाने के रूप में किया जाता था। स्थानीय लोग इसे आज भी अंग्रेजों की जेल के नाम से पहचानते हैं।
सुल्ताना डाकू से जुड़ा है इतिहास
बताया जाता है कि अंग्रेजों ने सुल्ताना डाकू को पकड़ने के लिए फ्रेडी यंग नाम के विशेष अधिकारी को बुलाया था। गिरफ्तारी के बाद सुल्ताना डाकू को कुछ समय तक इसी जेल में रखा गया था। हरिद्वार, बिजनौर और मुरादाबाद के इलाके में उसके बारे में कई लोक कथाएं और किवदंतियां प्रचलित हैं, जिनमें उसे अंग्रेजों और अमीरों से धन लूटकर गरीबों की मदद करने वाला बताया जाता है।
झिलमिल झील सफारी से जुड़ेगी जेल
पर्यटन विभाग इस इमारत को संरक्षित कर इसे झिलमिल झील सफारी के साथ जोड़ने की योजना बना रहा है। इससे यहां आने वाले सैलानी जंगल सफारी का आनंद लेने के साथ ऐतिहासिक धरोहर को भी देख सकेंगे। विभाग का मानना है कि इस जेल से जुड़ी झील को भी विकसित करने से पर्यटकों के लिए नया आकर्षण तैयार होगा।
स्थानीय लोगों ने उठाई पुरानी मांग
श्यामपुर के स्थानीय लोग लंबे समय से इस जेल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि जब देशभर के लोग सुल्ताना डाकू से जुड़े किले को देखने पहुंचते हैं, तो उससे जुड़ी इस जेल को देखने भी आएंगे। लोगों का मानना है कि इससे ऐतिहासिक स्थल को पहचान मिलेगी और क्षेत्र का विकास भी होगा।
पर्यटन कारोबार को मिलेगी नई दिशा
हरिद्वार में गंगा स्नान और मंदिरों के दर्शन के लिए तो बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन एडवेंचर टूरिज्म का दायरा अभी छोटा है। ऐसे में जंगल सफारी और ऐतिहासिक जेल को आपस में जोड़ने से श्रद्धालुओं के साथ साहसिक गतिविधियों के शौकीन पर्यटक भी यहां रुकेंगे। इससे होटल, गाइड और स्थानीय कारोबार को फायदा पहुंचने की उम्मीद है।
युवाओं को मिलेगी इतिहास की जानकारी
पर्यटन विभाग का मानना है कि ऐसे स्थलों की जानकारी के लिए युवा पीढ़ी उत्सुक रहती है। सुल्ताना डाकू की सक्रियता गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों में रही थी, इसलिए उससे जुड़ी जगहों को सहेजकर रखना जरूरी है। जेल को पर्यटन से जोड़ने के बाद स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले सैलानियों तक इसकी जानकारी पहुंचाने पर जोर रहेगा।
इस योजना के पूरा होने के बाद हरिद्वार में आने वाले सैलानी इतिहास, रोमांच और साहसिक गतिविधियों का अनोखा अनुभव ले सकेंगे। पर्यटन विभाग का मानना है कि धार्मिक यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु भी इस स्थल को देखने रुकेंगे, जिससे यहां कुछ दिन ठहरने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और होटल तथा गाइड को सीधा लाभ मिलेगा।