चमोली। जिले की नीति घाटी के तमक क्षेत्र में धौलीगंगा नदी पर झील बनने की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई। न्यूज18 लोकल के मुताबिक सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि नदी का बहाव रुक गया है और पानी भराव होने लगा है। इस सूचना के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल अपनी टीमों को अलर्ट मोड पर ले लिया और मौके पर जांच के आदेश दिए।
ग्रामीणों ने खारिज की अफवाह
स्थानीय निवासियों नरेंद्र रावत, दीपक रावत, रघुवीर सिंह और हरेंद्र राणा ने झील बनने के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उनके अनुसार पिछले दिनों की भारी बारिश के दौरान पहाड़ से बड़ा मलबा धौलीगंगा में गिरा था, जिससे नदी का बहाव कुछ समय के लिए धीमा जरूर हुआ, लेकिन पानी का रिसाव लगातार बना रहा। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि नदी में कोई बड़ा अवरोध नहीं है, नदी सामान्य रूप से बह रही है और लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
मौके पर पहुंचीं प्रशासनिक टीमें
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने सूचना मिलते ही एसडीएम जोशीमठ और एसडीआरएफ की टीम को तुरंत मौके पर भेजा। दोनों टीमों ने पहुंचकर क्षेत्र का निरीक्षण किया और स्थिति का आकलन किया। एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि मौके पर झील बनने जैसी कोई स्थिति नहीं है। नदी में मलबा जमा जरूर है, लेकिन बहाव सामान्य बना हुआ है और टीमें लगातार निगरानी रख रही हैं।
सैटेलाइट तस्वीरों से बढ़ी चिंता
वहीं नवभारत टाइम्स के मुताबिक सैटेलाइट तस्वीरों में तपोवन के ऊपर धौलीगंगा में झील जैसा आकार दिखने की चर्चा ने विशेषज्ञ हलकों में चिंता बढ़ा दी है। भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में छोटी सी हलचल भी बड़ी आपदा का रूप ले सकती है, इसलिए ऐसी हर सूचना पर गंभीरता से काम लिया जाना जरूरी है।
विशेषज्ञों की निगरानी में क्षेत्र
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एमपीएस बिष्ट वर्ष 1986 से इस क्षेत्र का भूगर्भीय सर्वे कर रहे हैं। नवभारत टाइम्स के अनुसार उन्होंने हाल में 25 से 28 अक्टूबर के बीच क्षेत्र की स्थिति दर्ज की, जिसके बाद झील को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई। जिलाधिकारी ने आपदा प्रबंधन विभाग और विशेषज्ञों को भी मौके का आकलन करते रहने और जरूरत पड़ने पर जल निकासी की व्यवस्था तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
2021 की त्रासदी की याद
धौलीगंगा को अलकनंदा जलग्रहण क्षेत्र की सबसे संवेदनशील नदियों में गिना जाता है। वर्ष 2021 में ऋषिगंगा क्षेत्र में आई तबाही अब भी लोगों के जेहन में ताजा है, इसलिए झील जैसी किसी भी चर्चा से पूरे क्षेत्र में दहशत फैल जाती है। प्रशासन के मुताबिक वर्तमान स्थिति नियंत्रण में है और हर हालात से निपटने के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है।
अफवाहों से परहेज की अपील
निरीक्षण के बाद प्रशासन ने साफ किया कि फिलहाल किसी प्रकार का खतरा नहीं है, लेकिन अधिकारी हर स्थिति से निपटने के लिए सतर्क हैं। जिलाधिकारी गौरव कुमार ने आम जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासनिक सूचनाओं पर भरोसा करें। स्थिति में कोई बदलाव होने पर तुरंत आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और जनता को सूचित किया जाएगा।