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स्वास्थ्य

हरिद्वार: मरीजों की मौत के बाद भी निजी अस्पतालों को क्लीन चिट, स्वास्थ्य विभाग के रवैये पर उठे सवाल

हरिद्वार में निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों की मौत के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों पर लगाई गई रोक हटा दी है।

हरिद्वार। जनपद हरिद्वार के निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। परिजन डॉक्टरों की लापरवाही का आरोप लगाते हैं और अस्पताल के बाहर हंगामा करते हैं। ऐसे मामलों में अस्पताल सील भी किए जाते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद ही उन्हें क्लीन चिट मिल जाती है और ताले खुल जाते हैं।

तीन महीने में आईं कई मौत की खबरें

बीते कुछ महीनों में जनपद के निजी अस्पतालों में चार मरीजों ने इलाज के दौरान जान गंवाई है। इन मामलों में स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों पर लगाई गई रोक हटा दी है। परिजनों का कहना है कि जांच की कार्रवाई कागजी साबित हो रही है और लापरवाही के आरोपियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

रानीपुर मोड़ के पास गर्भवती महिला की मौत

ताजा मामला शहर के सबसे व्यस्त चौराहे रानीपुर मोड़ के पास स्थित एक निजी अस्पताल का है। यहां आठ नवंबर की सुबह इलाज के दौरान एक गर्भवती महिला ने दम तोड़ दिया। जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर ऑपरेशन थिएटर सील कर दिया।

मां गंगा मेटरनिटी में दो प्रसूताओं की मौत

इससे पहले मां गंगा मेटरनिटी नर्सिंग होम में ऑपरेशन के दौरान दो प्रसूताओं की मौत हो गई थी, जिसमें मुकदमा भी दर्ज हुआ। इसी तरह एसआर मेडिसिटी और सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर में भी मरीजों की मौत के मामले सामने आए। इन मामलों में विभाग ने सीलिंग की कार्रवाई तो की, लेकिन कुछ दिनों बाद अस्पतालों को क्लीन चिट भी दे दी गई।

कागज सही मिलने का दिया जा रहा हवाला

जांच से जुड़े एसीएमओ डॉ. रमेश कुंवर का कहना है कि निजी अस्पतालों में अब तक सामने आए सभी मामलों की गहनता से जांच की गई है। जिन अस्पतालों को क्लीन चिट दी गई, वहां के सभी कागज सही पाए गए। उनके मुताबिक अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से ऑपरेशन और इलाज से जुड़े जोखिम की जानकारी देकर सहमति ले ली थी और सहमति पत्रों पर परिजनों के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी से नहीं हो सकी बात

इस मामले में जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने व्यस्तता का हवाला देकर फोन काट दिया। बार-बार संपर्क करने पर उन्होंने मैसेज भेजने का अनुरोध किया, मगर मैसेज का भी जवाब नहीं आया। ऐसे में इन मौतों की जांच और कार्रवाई को लेकर सवाल और गहरे हो रहे हैं।

सर्दी बढ़ने से अस्पतालों पर बढ़ा दबाव

इस बीच प्रदेश में सुबह और शाम की ठिठुरन बढ़ गई है। मौसम विभाग के मुताबिक सभी जनपदों में मौसम शुष्क बना रहेगा और दिन के समय धूप से हल्की गर्मी का एहसास रहेगा। ठंड बढ़ने के साथ ही अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव पड़ रहा है।

लोगों ने की गहन जांच की मांग

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि मरीजों की मौत के इन मामलों की जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन और उच्च स्वास्थ्य अधिकारियों की संयुक्त टीम से भी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि लोगों का स्वास्थ्य विभाग पर भरोसा बना रहे।