उत्तरकाशी। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर नालूपानी के समीप भूस्खलन होने से मार्ग बंद हो गया है। जिला प्रशासन के मुताबिक पहाड़ी से लगातार मलबा और बड़े पत्थर गिरने के चलते सड़क का बड़ा हिस्सा दब गया और मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। मार्ग बंद होने से गंगोत्री धाम की ओर जा रहे श्रद्धालु और स्थानीय लोग रास्तों में फंस गए।
यात्रियों की लंबी कतारें
मार्ग बंद होते ही दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें खड़ी हो गईं। ईटीवी भारत की खबर के मुताबिक नालूपानी के पास भयंकर भूस्खलन के बाद यात्री घंटों इंतजार करते रहे, जिनमें बच्चों और बुजुर्गों समेत कई श्रद्धालु शामिल थे। पहाड़ी इलाके में ठहराव और खान-पान की व्यवस्था सीमित होने से इंतजार कर रहे लोगों की दिक्कत और बढ़ गई।
मलबा हटाने का काम जारी
मौके पर बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन और लोक निर्माण विभाग की टीमें मशीनरी के साथ पहुंच गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पहाड़ी से बार-बार पत्थर गिरते रहने के कारण मलबा हटाने का काम बीच-बीच में रुक रहा है, जिससे बहाली में देरी हो रही है। अधिकारियों ने ढलान स्थिर होने तक जोखिम न लेने की बात कही है और मौसम के ठीक होने पर तेजी से काम आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया है।
यात्रा के बीच बढ़ी चिंता
यह रुकावट उस समय आई है जब गंगोत्री धाम की दूसरे चरण की यात्रा चल रही है। जागरण की खबर के मुताबिक इस चरण की शुरुआत के पहले ही दिन राजमार्ग पर रुकावटों से श्रद्धालुओं को दिक्कतें मिली थीं। सितंबर में यात्रा की भीड़ पीक से कम हो चुकी होती है, लेकिन रोज श्रद्धालुओं के जत्थे अब भी धाम की ओर निकलते हैं। गंगोत्री हाईवे चारधाम यात्रा की सबसे अहम कड़ियों में से एक है, क्योंकि इसी मार्ग से गंगोत्री धाम, गंगोत्री हिमनद और हर्षिल जैसे स्थलों तक पहुंचा जाता है।
ऊपरी गांवों पर सीधा असर
इस मार्ग से ही ऊपरी गांवों तक राशन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचती है। बंदी से श्रद्धालुओं के साथ-साथ वहां के स्थानीय लोगों का सफर भी ठप पड़ गया है। अस्पताल और बाजार के लिए निकले कई लोग मार्ग की एक ही ओर अटक गए, जिससे प्रशासन को स्थानीय स्तर पर मदद का इंतजाम करना पड़ा।
बारिश के मौसम में यह खंड बार-बार बंद होता रहता है। नालूपानी और आसपास की ढलानें मानसून में बार-बार अस्थिर होती रहती हैं। पिछले सालों में भी बरसात के दौरान इस खंड पर भूस्खलन से मार्ग कई बार बंद हुआ है और हर बार यात्रा प्रभावित हुई है। विशेषज्ञ ढलानों पर बढ़ते निर्माण और जल निकासी की समस्या को ऐसी घटनाओं के बढ़ने के बड़े कारण मानते हैं।
स्थायी समाधान की तैयारी
अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा दीवार, रॉक-नेट और जल निकासी के स्थायी इंतजाम किए जाएंगे, ताकि यात्रा के दौरान बार-बार रुकावट न आए। प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी इंतजाम किए हैं और यात्रियों से अपील की है कि सफर से पहले मार्ग की स्थिति की आधिकारिक जानकारी जरूर लें, ताकि अचानक बंदी की स्थिति में वे रास्तों में न फंसें।